Noida Sleeper Bus Gangrape मामले में Delhi Police की 398 पेज की चार्जशीट में कथित सीमेन सैंपल और बाल जैसे बायोलॉजिकल सबूतों का जिक्र है। बस का CCTV बंद था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। बिना पुलिस वेरिफिकेशन के रखे गए आरोपियों और बस की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

Greater Noida Bus Gangrape: दिल्ली पुलिस ने ग्रेटर नोएडा बस गैंगरेप मामले में आखिरकार 398 पेज की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल चार्जशीट में बस ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बायोलॉजिकल सैंपल्स यानी सीमेन और बालों को बताया गया है। पुलिस ने साफ किया है कि फॉरेंसिक जांच में मिले ये सबूत इस खौफनाक मामले में आरोपियों का गुनाह साबित करने के लिए बेहद ठोस हैं।

नोएडा बस गैंगरेप: 4 अगस्त की वह भयानक रात

यह पूरी घटना 4 अगस्त की है, जब उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग लड़की ग्रेटर नोएडा में एक बस में सवार हुई थी। उसे लगा था कि बस नोएडा सेक्टर 63 जाएगी, लेकिन बस में चढ़ने के बाद उसे अहसास हुआ कि अंदर कोई और यात्री नहीं है। जब उसने उतरने की कोशिश की, तो कंडक्टर ने जबरन बस का दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद चलती बस में दिल्ली के रास्ते पर नाबालिग के साथ शर्मनाक हरकत की गई और बाद में उसे कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास फेंक दिया गया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए कई टीमों ने बस के संभावित रूट पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। कुछ ही घंटों में बस तिमारपुर के एक पार्किंग क्षेत्र से बरामद कर ली गई। ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को तिमारपुर से गिरफ्तार कर लिया।

चार्जशीट में खुली लापरवाही की पोल

पुलिस की चार्जशीट में सिर्फ जुर्म की दास्तान ही नहीं है, बल्कि सिस्टम की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है। जिस बस में यह वारदात हुई, उसका सीसीटीवी कैमरा खराब था और खिड़कियों पर पर्दे टंगे हुए थे। हैरानी की बात यह है कि बस में पैनिक बटन या व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम जैसी कोई सुरक्षा तकनीक नहीं थी। इसके अलावा, बस पर पहले से ही 11 चालान पेंडिंग थे , जिनमें सात जुलाई में तेज रफ्तार से जुड़े थे। दोनों आरोपियों को बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन के काम पर रख लिया गया था।

Supreme Court ने भी लिया मामले का संज्ञान

पुलिस ने 18 सितंबर को सिटी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी और 24 सितंबर को अदालत ने इसका संज्ञान लिया। चार्जशीट में 10 पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और अन्य लोगों को गवाह बनाया गया है। इस वीभत्स घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया है और 2012 के निर्भया कांड की दर्दनाक यादें ताजा कर दी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की बेंच ने तीखा सवाल उठाया है कि आखिर निर्भया कांड के इतने साल बाद भी सुरक्षा व्यवस्था और कानून लागू करने वाले तंत्र में कोई ठोस सुधार क्यों नहीं हुआ है? फिलहाल कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और चार्जशीट के आधार पर आरोपियों पर शिकंजा कसने की पूरी तैयारी है।