पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने PoK में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को उचित ठहराया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भारत की तरह देश का दुश्मन बताते हुए उनसे बातचीत की संभावना खत्म कर दी है।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में हुई कार्रवाई को सही ठहराया है। उन्होंने PoK के प्रदर्शनकारियों को भारत की तरह ही देश का दुश्मन बताया है। एक लोकल टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में पाक रक्षा मंत्री ने कहा कि अब प्रदर्शनकारियों से कोई बातचीत नहीं होगी। ख्वाजा आसिफ ने कहा, "हम प्रदर्शनकारियों और भारत को एक ही नजर से देखते हैं। वे भी भारत की तरह ही हमारे दुश्मन हैं। उनसे अब बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि वे पाकिस्तान के दुश्मन हैं।"

पिछले दिनों PoK में चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद हिंसा भड़क गई थी। पाकिस्तानी पुलिस और सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गोलीबारी में करीब 20 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हुए। पाकिस्तानी सरकार ने पुलिस को निर्देश दिया है कि जो कोई भी चुनाव का बहिष्कार करने की अपील करे, उससे सख्ती से निपटा जाए। इसी के बाद PoK में यह बड़ी कार्रवाई हुई, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। अब इसी को सही ठहराते हुए रक्षा मंत्री का यह बयान सामने आया है। इससे पहले 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भी ख्वाजा आसिफ ने भारत के खिलाफ कई विवादित बयान दिए थे। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी समेत कई प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि PoK चुनाव में कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को रद्द किया जाए।

PoK में प्रदर्शन क्यों हो रहा है? जानें 10 लेटेस्ट अपडेट

1 - 12 आरक्षित सीटों पर सबसे बड़ा विवाद

प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि PoK विधानसभा की 12 सीटें, जो पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, खत्म की जाएं। उनका आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद स्थानीय राजनीति को प्रभावित करता है।

2 - JAAC आंदोलन की अगुवाई कर रहा है

प्रदर्शनों का नेतृत्व Joint Awami Action Committee (JAAC) कर रहा है। यह संगठन चुनावी सुधार, स्थानीय अधिकार और सरकारी ढांचे में बदलाव की मांग कर रहा है।

3 - चुनाव बहिष्कार की अपील

JAAC ने कई इलाकों में चुनाव का बहिष्कार करने की अपील की। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में चुनाव निष्पक्ष नहीं हैं।

4 - सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों में हिंसक झड़प

चुनाव से पहले और मतदान के दौरान कई जगह पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव हुआ। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग बताई गई है, लेकिन कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की पुष्टि हुई है।

5 - कई जिलों में चुनाव प्रभावित

सुरक्षा हालात बिगड़ने के कारण कुछ जिलों में मतदान टालना पड़ा और भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए।

6 - JAAC पर पाकिस्तान का सख्त रुख

पाकिस्तान प्रशासन ने JAAC को प्रतिबंधित संगठन बताया है और आरोप लगाया है कि आंदोलन में हिंसक तत्व शामिल हो गए हैं। दूसरी ओर JAAC खुद को शांतिपूर्ण जनआंदोलन बताता है। दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

7 - ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने प्रदर्शनकारियों को भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन बताया और कहा कि उनसे अब बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है।

8 - मानवाधिकार संगठनों की चिंता

कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने गोलीबारी, इंटरनेट बंदी और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

9 - UN और OIC से हस्तक्षेप की मांग

JAAC ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) और OIC को पत्र लिखकर पाकिस्तान पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए हैं और अंतरराष्ट्रीय दखल की मांग की है।

10 - आंदोलन सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं

आरक्षित सीटों के अलावा प्रदर्शनकारी अधिक राजनीतिक स्वायत्तता, संसाधनों पर स्थानीय अधिकार, सरकारी विशेषाधिकारों में कटौती और प्रशासनिक सुधार जैसी मांगें भी उठा रहे हैं।

PoK पूरा विवाद क्या है?

इस समय PoK में सबसे बड़ा विवाद 12 आरक्षित विधानसभा सीटों का है। प्रदर्शनकारियों का कहना है इन सीटों के जरिए पाकिस्तान की संघीय सरकार क्षेत्र की राजनीति पर प्रभाव बनाए रखती है, जबकि पाकिस्तान सरकार इस व्यवस्था को वैध प्रतिनिधित्व का हिस्सा बताती है। यही मतभेद अब बड़े राजनीतिक और सुरक्षा संकट में बदल गया है।