Paper Leak Law Amendment: पेपर लीक पर लगाम कसने के लिए मोदी सरकार ने कानून में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है। नए संशोधन में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना, 10 साल तक की जेल और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान शामिल है।
What is Paper Leak Law Amendment देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने लाखों युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं रद्द होने से छात्रों का समय, मेहनत और पैसा तीनों प्रभावित हुए। अब केंद्र सरकार ने इस समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 में बड़ा संशोधन करने का फैसला किया है। मोदी कैबिनेट ने संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसे सोमवार को संसद में पेश किया जाएगा।
दो साल पहले बना कानून क्यों नहीं रोक पाया पेपर लीक?
2024 में लागू किए गए कानून का उद्देश्य UPSC, SSC, RRB, IBPS, NTA जैसी केंद्र सरकार की परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा घोटालों पर रोक लगाना था। कानून के तहत प्रश्नपत्र लीक करना, उत्तर कुंजी साझा करना, OMR शीट में छेड़छाड़, फर्जी एडमिट कार्ड बनाना और परीक्षा प्रणाली हैक करना अपराध घोषित किया गया था।
हालांकि, इसके बावजूद कई बड़ी परीक्षाएं पेपर लीक के कारण रद्द करनी पड़ीं। इसकी सबसे बड़ी वजह अपेक्षाकृत कम सजा और सीमित दायरा माना गया। सामान्य मामलों में 3 से 5 साल की सजा और संगठित अपराध में 5 से 10 साल की सजा होने के बावजूद माफिया पर अपेक्षित असर नहीं दिखा। साथ ही यह कानून मुख्य रूप से केंद्र सरकार की अधिसूचित परीक्षाओं तक सीमित रहा।
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संशोधन के बाद क्या होंगे बड़े बदलाव?
मोदी सरकार अब कानून को और अधिक कठोर बनाने जा रही है। संशोधन विधेयक के अनुसार पेपर लीक से जुड़े मामलों में जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है। वहीं जेल की सजा 5 साल से बढ़ाकर 10 साल तक करने का प्रस्ताव है।
सबसे अहम बदलाव यह है कि ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट अनिवार्य होंगे, जिन्हें तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का लक्ष्य दिया जाएगा। इससे लंबे समय तक मुकदमे लंबित रहने की समस्या कम होगी और दोषियों को जल्द सजा मिल सकेगी। संगठित गिरोहों, परीक्षा एजेंसियों और पेपर लीक नेटवर्क पर पहले से ज्यादा कड़ी कार्रवाई का भी प्रावधान जोड़ा गया है।
उम्मीदवार नहीं, माफिया रहेगा कानून के निशाने पर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को दंडित करना नहीं है। यदि कोई उम्मीदवार नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई संबंधित परीक्षा संस्था के नियमों के अनुसार होगी।
इस कानून का फोकस उन लोगों, गिरोहों और संस्थाओं पर रहेगा जो पैसे या अन्य लाभ के लिए परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ करते हैं। यदि संसद से यह संशोधन पारित हो जाता है, तो माना जा रहा है कि पेपर लीक माफिया पर पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी कार्रवाई संभव होगी और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता मजबूत होगी।
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