UP के कुशीनगर निवासी 22 वर्षीय परसन कुमार जन्म से क्लबफुट की समस्या से जूझ रहे थे। उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान में छह ऑपरेशन के बाद उनकी चलने की क्षमता में सुधार हुआ। जानें उनके संघर्ष, इलाज और परिवार के सहयोग की पूरी कहानी।
Clubfoot Treatment: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो किसी के भी मन में उम्मीद की नई किरण जगा सकती है। भठही बुजुर्ग गांव के रहने वाले 22 वर्षीय परसन कुमार जन्म से ही क्लबफुट (मुड़े हुए पैर) की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। बचपन से चलना-फिरना एक बड़ी चुनौती था, लेकिन परसन ने कभी भी अपनी दिव्यांगता को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। मुश्किलों का सामना करते हुए उन्होंने न सिर्फ अपनी ग्रेजुएशन पूरी की, बल्कि एक प्राइवेट नौकरी करके अपने परिवार का आर्थिक सहारा भी बने।
क्लबफुट की बीमारी और इलाज की लंबी जद्दोजहद
परसन के माता-पिता, पिता बुनेला प्रसाद और मां मालती देवी ने अपने बेटे के इलाज के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। परिवार की आजीविका खेती-किसानी और छोटी-मोटी नौकरी पर टिकी है, फिर भी उन्होंने हमेशा बेटे का हौसला बढ़ाया:
- स्थानीय स्तर पर प्रयास: परिवार ने शुरुआत में कुशीनगर के जिला अस्पताल समेत कई डॉक्टरों से संपर्क किया, लेकिन वहां से कोई पक्का समाधान नहीं निकल सका।
- दोस्त की सलाह से मिली राह: काफी निराशा के बाद, परसन के एक दोस्त ने उन्हें उदयपुर स्थित नारायण सेवा संस्थान के बारे में जानकारी दी।
- संस्थान में रजिस्ट्रेशन: नई उम्मीद लेकर परसन 17 अक्टूबर 2025 को उदयपुर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनके पैरों की जांच की और इलाज की रूपरेखा तैयार की।
छह सफल ऑपरेशन और उम्मीदों की नई शुरुआत
पैरों के पंजों को सीधा करना आसान नहीं था। इसके लिए डॉक्टरों को एक लंबी और जटिल सर्जिकल प्रक्रिया से गुजरना पड़ा:
- लंबे इलाज का सफर: पैरों को पूरी तरह सामान्य करने के लिए परसन के कुल छह बड़े ऑपरेशन किए गए। इस दौरान उन्होंने धैर्य और हिम्मत बनाए रखी।
- 17 अगस्त 2026 का ऐतिहासिक दिन: 17 अगस्त 2026 को उनका आखिरी ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और कुछ ही दिनों की रिकवरी के बाद वे अपने पैरों पर चलने लगे।
- परिवार में खुशी की लहर: बेटे को बिना किसी सहारे के आत्मविश्वास के साथ चलता देख पिता बुनेला प्रसाद, मां मालती देवी, भाई राम भरोसा और बहन प्रतिभा के चेहरे पर सुकून और खुशी साफ झलक रही है।
नारायण सेवा संस्थान का जताया आभार
अब बिना किसी तकलीफ के सामान्य रूप से चल पा रहे परसन का कहना है कि उनका पैर अब बिल्कुल ठीक हो चुका है। वे उदयपुर के संस्थान के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहते हैं कि नारायण सेवा संस्थान दिव्यांगजनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहां जरूरतमंदों का पूरी तरह मुफ्त इलाज किया जाता है। परसन का यह सफर साबित करता है कि अगर परिवार का साथ, शिक्षा और मन में अटूट आत्मविश्वास हो, तो इंसान हर शारीरिक बाधा को पार कर सकता है।








