Petrol Diesel Price Today: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद, 8 अक्टूबर को भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बदले हैं। इंटरनेशनल मार्केट में सप्लाई की चिंताओं के बीच भी भारतीय तेल कंपनियों ने रिटेल कीमतों को स्थिर रखा है।

Petrol Diesel Rate 8 October 2026: पेट्रोल और डीजल की कीमतें गुरुवार, 8 अक्टूबर को भारत के प्रमुख शहरों में स्थिर रहीं। ग्लोबल मार्केट में एनर्जी सप्लाई की चिंताओं के बीच कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, लेकिन इसका असर घरेलू बाजार पर नहीं दिखा। सरकारी तेल कंपनियों ने सुबह 6 बजे अपनी रूटीन प्राइस रिवीजन की, लेकिन प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के रेट जस के तस रखे।

फ्यूल स्टेशनों पर यह स्थिरता ऐसे समय में देखने को मिली है जब इंटरनेशनल ऑयल मार्केट पर फिर से दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे विवाद और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते खतरों के कारण सप्लाई की चिंताएं तेज हो गई हैं। यह रास्ता ग्लोबल ऑयल शिपमेंट के लिए बहुत अहम माना जाता है।

आज के पेट्रोल और डीजल के रेट - 8 अक्टूबर, 2026

शहरपेट्रोल (रु/लीटर)डीजल (रु/लीटर)
दिल्ली102.12 रुपये95.20 रुपये
मुंबई111.21 रुपये97.83 रुपये
कोलकाता113.51 रुपये99.82 रुपये
चेन्नई107.77 रुपये99.55 रुपये
बेंगलुरु111.68 रुपये99.56 रुपये
हैदराबाद116.15 रुपये104.23 रुपये

लेटेस्ट रेट्स के मुताबिक, अलग-अलग शहरों में फ्यूल की कीमतों में काफी अंतर है। ऐसा राज्य स्तर पर लगने वाले टैक्स, ड्यूटी और अन्य लोकल खर्चों की वजह से होता है। जून से प्रमुख महानगरों में कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं, जबकि इंटरनेशनल क्रूड मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है।

दूसरी तरफ, ग्लोबल ऑयल मार्केट लगातार दबाव में है। गुरुवार को 0116 GMT तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.33 डॉलर या 1.33% बढ़कर 101.53 डॉलर प्रति बैरल हो गया। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.11 डॉलर या 1.26% की बढ़त के साथ 89.39 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एनर्जी मार्केट के लिए एक बड़ी चिंता बना हुआ है। मौजूदा विवाद से पहले, इस जलमार्ग से ग्लोबल ऑयल और फ्यूल सप्लाई का लगभग 20% शिपमेंट होता था। हाल ही में शिपिंग पर हुए हमलों ने सप्लाई में और रुकावट आने का डर बढ़ा दिया है।

एएनजेड (ANZ) के सीनियर कमोडिटी स्ट्रैटेजिस्ट डेनियल हाइन्स ने एक नोट में कहा, "अतीत में, ऐसे हमलों के कारण फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से शिपमेंट में कमी आई है। इस बार, उत्पादक अपने जहाजों के नुकसान का जोखिम उठाने को तैयार दिख रहे हैं, क्योंकि उनके पास अपना तेल इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचाने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।"

हाइन्स ने यह भी बताया कि रणनीतिक तेल भंडार (strategic oil stock) जारी करने से सप्लाई फ्लो को अस्थायी रूप से सपोर्ट मिल सकता है, लेकिन इससे नई उत्पादन क्षमता (production capacity) नहीं बनेगी।

इस बीच, 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार (US crude inventories) में 3.2 मिलियन बैरल की गिरावट आई है। यह विश्लेषकों के 1.7 मिलियन बैरल की गिरावट के अनुमान से कहीं ज्यादा है। डीजल और जेट-फ्यूल के भंडार में भी कमी आई है, जिससे ग्लोबल फ्यूल मार्केट में अनिश्चितता और बढ़ गई है।