PM Modi Sweden Visit: स्वीडन के गोथेनबर्ग में आयोजित ERT (European Round Table for Industry) की हाई-प्रोफाइल बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोप की बड़ी कंपनियों से भारत में निवेश बढ़ाने की अपील की। वोडाफोन, नोकिया, Airbus, शेल और SAP जैसी दिग्गज कंपनियों के CEOs के सामने PM मोदी ने कई सेक्टरों में पार्टनरशिप का बड़ा विजन रखा।
PM Modi Sweden Gothenburg Meeting: स्वीडन के औद्योगिक दिल कहे जाने वाले गोथेनबर्ग (Gothenburg) में 17 मई 2026 की शाम को इतिहास रच दिया गया। यूरोप के सबसे ताकतवर और रईस बिजनेस कम्युनिटी के सामने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा दांव चला है, जिसने चीन से लेकर अमेरिका तक के बाजारों में हलचल मचा दी है। यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री (ERT) की इस हाई-प्रोफाइल बैठक में पीएम मोदी ने यूरोप की सबसे बड़ी कंपनियों के चीफ एग्जीक्यूटिव्स (CEOs) और चेयरपर्सन को 'कॉल टू एक्शन' दिया और कहा, 'भारत में निवेश करिए और अभी करिए।' आइए जानते हैं इस मीटिंग में क्या-क्या हुआ और इससे भारत को कितना बड़ा फायदा होने वाला है...

स्वीडन में क्यों खास रही PM मोदी की यह मीटिंग?
रविवार की शाम स्वीडन के औद्योगिक शहर गोथेनबर्ग में आयोजित इस राउंडटेबल में यूरोप की बड़ी कंपनियों के टॉप अधिकारी मौजूद थे। यह बैठक इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसे स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन (Ulf Kristersson) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन (Ursula von der Leyen) ने संयुक्त रूप से होस्ट किया था। यह हाल के सालों में भारत और यूरोप के बीच सबसे बड़ी डिप्लोमैटिक-बिजनेस मीटिंग मानी जा रही है।

इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में कौन-कौन मौजूद था?
गोथेनबर्ग की इस हाई-प्रोफाइल बैठक में यूरोप के उस टॉप कॉरपोरेट कंपनियों की मौजूदगी थी, जो पूरे ग्लोबल मार्केट को कंट्रोल करता है। पीएम मोदी के सामने डाइनिंग टेबल पर यूरोप के 5 अलग-अलग सेक्टर्स की सबसे बड़ी 55 ग्लोबल कंपनियां (Global Brands) मौजूद थीं।
टेलीकॉम और डिजिटल सेक्टर्स के दिग्गज
दुनिया को कनेक्टिविटी देने वाली Vodafone, Ericsson, Nokia और Orange जैसी महाशक्तियां इस बैठक का हिस्सा थीं, जो भारत के डिजिटल भविष्य पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
टेक और सेमीकंडक्टर किंग
दुनिया के सेमीकंडक्टर (चिप) बाजार की रीढ़ कही जाने वाली ASML और NXP के साथ-साथ टेक जगत की नामी कंपनियां SAP और Capgemini भी कमरे में मौजूद थीं, जो भारत को ग्लोबल टेक हब बनाने के लिए सबसे अहम हैं।
एनर्जी और क्लीन टेक (ग्रीन एनर्जी) के महारथी
नेट-जीरो और सस्टेनेबल एनर्जी क्षेत्र की दिग्गज ग्लोबल कंपनियां ENGIE, TotalEnergies, Shell और Umicore भी इस कूटनीतिक चर्चा में शामिल रहीं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर, मोबिलिटी और डिफेंस
हैवी वेहिकल्स, विमानों और स्टील निर्माण में दुनिया पर राज करने वाली कंपनियां जैसे Volvo Group, Maersk, Airbus, Saab और ArcelorMittal सीधे पीएम मोदी के विजन को सुन रही थीं।
हेल्थकेयर, लाइफ साइंसेज और कंज्यूमर गुड्स
मेडिकल और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े दुनिया के सबसे भरोसेमंद ब्रांड्स AstraZeneca, Roche, Merck, Philips, Nestlé और Unilever के शीर्ष अधिकारी भी इस ऐतिहासिक मीटिंग का हिस्सा रहें।
'मदर ऑफ ऑल डील्स' और पीएम मोदी का 5-सेक्टर फॉर्मूला
हाल ही में हुए India-EU FTA को बिजनेस जगत में 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी ने यूरोपीय कंपनियों के सामने 5 सबसे बड़े सेक्टर्स का रोडमैप रखा और हर कंपनी को अगले 5 साल में भारत के लिए एक बड़ा और नया कमिटमेंट देने की अपील की।
PM मोदी ने किन 5 सेक्टरों पर सबसे ज्यादा जोर दिया?
टेलीकॉम और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर: 5G से 6G ट्रांजिशन, AI नेटवर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर भारत को ग्लोबल हब बनाने पर जोर दिया गया।
AI और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग: भारत को एंड-टू-एंड ग्लोबल टेक हब बनाना, जहां ASML और NXP जैसी कंपनियों की भूमिका अहम होगी।
ग्रीन एनर्जी और EV: हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक व्हीकल, एनर्जी स्टोरेज और डीकार्बोनाइजेशन जैसे सेक्टरों में निवेश की अपील की गई।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और मोबिलिटी: एयरोस्पेस, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन स्टील और डिफेंस सेक्टर में बड़े प्रोजेक्ट्स पर चर्चा हुई।
हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज: एडवांस्ड वैक्सीन, कैंसर केयर, डिजिटल हेल्थ और मेडिकल डिवाइसेज पर सहयोग बढ़ाने की बात हुई।
PM मोदी ने कंपनियों के सामने क्या बड़ा प्रस्ताव रखा?
प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ निवेश की अपील नहीं की, बल्कि कंपनियों को भरोसा दिलाने के लिए कई ठोस प्रस्ताव भी दिए। इनमें हर साल भारत-यूरोप सीईओ राउंडटेबल (India-Europe CEO Roundtable) आयोजित करना, सेक्टर-स्पेशल वर्किंग ग्रुप बनाना, ईआरटी इंडिया डेस्क (ERT India Desk) तैयार करना, बड़े प्रोजेक्ट्स की सरकारी मॉनिटरिंग और टाइम पर डिलीवरी सुनिश्चित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। PM मोदी ने पूछा, 'क्या यहां मौजूद हर कंपनी भारत के लिए एक नया और बड़ा कमिटमेंट कर सकती है? अगले पांच साल में शुरू होने वाले फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स की पहचान कीजिए, भारत सरकार हर कदम पर साथ खड़ी होगी।'

India-EU Free Trade Deal क्यों है गेमचेंजर?
इस बैठक की टाइमिंग भी बेहद अहम मानी जा रही है। हाल ही में इंडिया-ईयू एफटीए (India-EU Free Trade Agreement) को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। इसे कई एक्सपर्ट्स 'मदर्स ऑफ ऑल डील्स' तक कह रहे हैं। इसके अलावा भारत और यूरोप के बीच सिक्योरिटी और डिफेंस पार्टनरशिप (Security & Defence Partnership), मोबिलिटी एग्रिमेंट (Mobility Agreement), ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (Trade and Technology Council) जैसे बड़े समझौते भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
दुनिया की कंपनियों के लिए भारत क्यों बन रहा सबसे बड़ा मौका?
ग्लोबल कंपनियां अब चीन के विकल्प के रूप में एक भरोसेमंद पार्टनर तलाश रही हैं और भारत इस खांचे में बिल्कुल फिट बैठता है। पीएम मोदी ने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इस बड़ी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े पेश किए और उन ताकतों को गिनाया, जो दुनिया की कंपनियों को आकर्षित कर रही हैं। उन्होंने कहा, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। 1.4 अरब की विशाल आबादी, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम (Startup Ecosystem), GST, PLI स्कीम, कॉर्पोरेट टैक्स में कमी (Corporate Tax Cut) और FDI रिफॉर्म्स जैसे बड़े बदलाव हुए हैं। यानी भारत अब सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
ERT क्या है?
यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री (European Round Table for Industry) यूरोप की सबसे प्रभावशाली बिजनेस संस्थाओं में से एक मानी जाती है। इसमें करीब 55 बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के चेयरमैन और CEOs शामिल हैं। यह संस्था यूरोप की आर्थिक नीतियों और इंडस्ट्रियल स्ट्रेटेजी पर बड़ा प्रभाव रखती है और सीधे EU संस्थाओं के साथ काम करती है।
भारत के लिए कितना बड़ा हो सकता है फायदा?
अगर इस बैठक के बाद यूरोप की कंपनियां भारत में बड़े निवेश का फैसला करती हैं, तो इसका असर AI, सेमीकंडक्टर, EV, डिफेंस और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टरों में दिखाई दे सकता है। इससे भारत में रोजगार, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग को भी बड़ा बूस्ट मिल सकता है।

