प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर उच्च-स्तरीय बैठक की। इसमें ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े खतरों पर चर्चा हुई। भारत की ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने ऑफिस में एक इमरजेंसी हाई-लेवल मीटिंग की। इस मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल समेत कई बड़े मंत्री और अधिकारी शामिल हुए। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी इस बैठक में मौजूद थे।

मीटिंग में पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बने ग्लोबल हालात का जायजा लिया गया। इस बात पर खास तौर पर चर्चा हुई कि यह संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा को कैसे प्रभावित कर रहा है। भारत अपने कुल कच्चे तेल का 40 फीसदी और एलएनजी का 60 फीसदी पश्चिम एशिया के देशों से ही आयात करता है। ईरान की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से जहाजों और माल की आवाजाही में रुकावट आई है। मीटिंग में इस चुनौती से निपटने के तरीकों पर भी बात हुई। बैठक में ऐसी रणनीति बनाई गई ताकि देश में ईंधन की सप्लाई बिना रुके चलती रहे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे उतार-चढ़ाव से निपटा जा सके।

West Asia War को लेकर 10 ताजा अपडेट

- अमेरिका ने ईरान पर नए बड़े हवाई हमले किए और कहा- यह अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों का जवाब है।
- ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिनमें कई को एयर डिफेंस सिस्टम ने रोका।
- सऊदी अरब पहली बार खुलकर अमेरिकी कार्रवाई के साथ दिखा और ईरान समर्थित गुटों पर हमलों में शामिल हुआ।
- होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में तनाव बढ़ा, जिससे तेल और शिपिंग रूट पर खतरा गहराया।
- मिस्र के स्वेज नहर क्षेत्र के पास जहाजों पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंता में।
- ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रेड सी में नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा कर दी, जिससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
- कूटनीतिक प्रयास फिलहाल ठप हैं। ओमान, पाकिस्तान और खाड़ी देशों की मध्यस्थता से अभी कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। 
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, हालांकि बाद में कुछ नरमी आई। युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर जारी है। 
- भारत समेत कई देशों ने ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन पर निगरानी बढ़ा दी है, क्योंकि पश्चिम एशिया से तेल और LNG की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका। 
- युद्ध अब कई मोर्चों तक फैल चुका है- ईरान, अमेरिका, इज़राइल, जॉर्डन, इराक, यमन, सऊदी अरब और खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।