PoK में प्रतिबंध के बावजूद JAAC प्रदर्शन ने हिंसा क्यों भड़का दी? मुज़फ़्फ़राबाद-रावलकोट झड़प में 11 मौतें और दर्जनों घायल कैसे हुए? महंगाई, सीट विवाद और राजनीतिक दबाव ने हालात इतने विस्फोटक क्यों बनाए? क्या चुनाव से पहले PoK में यह संकट और बड़े टकराव का संकेत है?

PoK Protests: पाकिस्तान के अवैध कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) से इस वक्त एक बेहद खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे क्षेत्र को एक सुलगते हुए ज्वालामुखी में तब्दील कर दिया है। सरकार द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और संगीनों के साये को धता बताते हुए हज़ारों की तादाद में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। मुज़फ़्फ़राबाद और रावलकोट में भड़की इस ताज़ा और अभूतपूर्व हिंसा में अब तक कम से कम 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 70 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) द्वारा बुलाए गए इस पूर्ण बंद ने पाकिस्तानी हुकूमत की चूलें हिला दी हैं और हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि पूरे इलाके में सेना और अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा है।

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मोर्चरी के बाहर मची चीख-पुकार... जब अचानक चलने लगीं अंधाधुंध गोलियां!

इस खूनी संघर्ष की शुरुआत उस वक्त हुई जब रावलकोट के एक स्थानीय अस्पताल की मोर्चरी (शवगृह) के बाहर हज़ारों की उग्र भीड़ जमा हो गई। दरअसल, वहां पिछले दिनों पुलिस की गोलीबारी में मारे गए एक सामाजिक कार्यकर्ता का शव रखा हुआ था। सस्पेंस और तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित घोषित किए जा चुके JAAC के समर्थक अपने साथी के शव को लेकर प्रदर्शन करने अड़ गए। पूंछ के कमिश्नर सरदार वहीद खान के मुताबिक, अचानक भीड़ में छिपे कुछ अज्ञात हमलावरों ने पुलिस पर सीधी गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें चार पुलिस अधिकारियों और एक निर्दोष राहगीर की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई में अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिससे छह और प्रदर्शनकारी ढेर हो गए। अस्पताल की जमीन खून से लाल हो चुकी थी और चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार गूंज रही थी।

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45 सीटों का वो 'गुप्त एजेंडा': क्यों सुलग रहा है PoK?

इस भयंकर आक्रोश के पीछे पाकिस्तानी हुकूमत का एक बेहद विवादित और गुप्त राजनीतिक एजेंडा है। दरअसल, हाल ही में प्रशासन ने PoK की 45 सदस्यों वाली विधानसभा में से 12 सीटें पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने का एकतरफा फैसला सुनाया है। स्थानीय निवासियों और JAAC के नेताओं का आरोप है कि इस्लामाबाद इस कदम के ज़रिए कश्मीरियों के मूल प्रतिनिधित्व को खत्म करना चाहता है और बाहरी लोगों को सत्ता में बिठाने की गहरी साज़िश रच रहा है। पिछले दो सालों से यह इलाका पहले ही आसमान छूती महंगाई, आटे के संकट, भीषण बेरोज़गारी और 20-20 घंटे की बिजली कटौती से नरक बन चुका था, और इस नए चुनावी फैसले ने जलती आग में घी का काम कर दिया है।

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ब्लैकआउट और नरसंहार का आरोप: क्या दबा दी जाएगी कश्मीरियों की आवाज़?

पाकिस्तानी हुकूमत ने इस विद्रोह को कुचलने के लिए दमनकारी नीतियां अपना ली हैं। पूरे PoK में मोबाइल इंटरनेट और संचार सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक (ब्लैकआउट) कर दिया गया है ताकि घाटी का सच दुनिया के सामने न आ सके। JAAC के मुख्य कार्यालयों को सील कर दिया गया है और धारा 144 लागू कर दी गई है। इस खौफनाक माहौल के बीच, संगठन के शीर्ष नेता शौकत नवाज मीर ने सोशल मीडिया पर एक गुप्त वीडियो संदेश जारी करते हुए रोते हुए कहा, "सरकार ने रावलकोट में हमारे बेगुनाह लोगों का खुलेआम नरसंहार शुरू कर दिया है।" पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने भी इस दमन पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर गंभीर सवाल उठाए हैं और वहां एक विशेष फैक्ट-फाइंडिंग टीम भेजने का एलान किया है।

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चुनाव से पहले महायुद्ध की आहट: दुनिया भर में मचा हड़कंप!

आगामी 27 जुलाई को होने वाले चुनावों से ठीक पहले भड़की इस हिंसा ने अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है। स्थिति इतनी नाजुक और डरावनी हो चुकी है कि यूनाइटेड किंगडम (UK), ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे शक्तिशाली देशों ने अपने नागरिकों के लिए 'ट्रैवल एडवाइजरी' जारी कर दी है। इन देशों ने चेतावनी दी है कि PoK में कभी भी गृहयुद्ध जैसे हालात बन सकते हैं, रास्ते पूरी तरह बंद हैं और विदेशी नागरिकों की जान को गंभीर खतरा है। पाकिस्तानी सेना की इस बर्बरता ने साफ कर दिया है कि वह बंदूक के दम पर कश्मीरी आवाम को गुलाम बनाए रखना चाहती है, लेकिन इस बार जनता ने भी आर-पार की जंग का मन बना लिया है। सवाल अब भी बरकरार है—क्या यह चिंगारी पाकिस्तान के खात्मे की शुरुआत है?