Premanand Maharaj Padyatra News: करीब 5 महीने बाद प्रेमानंद महाराज वृंदावन में पदयात्रा करते नजर आए। महाराज के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ जुटी और लोग भावुक हो गए।

Premanand Maharaj Padyatra Vrindavan: वृंदावन की सड़कों पर शुक्रवार सुबह एक ऐसा नजारा दिखा, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। पूरे 5 महीने यानी करीब 150 दिन के लंबे इंतजार के बाद, जब संत प्रेमानंद महाराज अचानक सड़क पर पैदल चलते नजर आए, तो भक्तों के आंसू छलक पड़े। दरअसल, 23 अक्टूबर की सुबह-सुबह प्रेमानंद महाराज अपने नए आश्रम यमुना बिहार कुंज से केली कुंज आश्रम की तरफ जा रहे थे। जब उनकी गाड़ी वाराह घाट तिराहे के पास पहुंची, तो वहां भक्तों की भारी भीड़ खड़ी थी। इसके बाद महाराज जी ने अपनी गाड़ी रुकवाई और पैदल चलने लगे। उन्हें अचानक पैदल चलता देख सड़क के दोनों तरफ खड़े भक्त भावुक होकर रोने लगे और पूरे रास्ते 'राधे-राधे' और 'श्री हरिवंश' के जयकारे गूंजते रहे।

केली कुंज आश्रम में बिताया आधा घंटा

पैदल चलते हुए महाराज जी केली कुंज आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले राधा रानी की पूजा की और फिर अपने गुरु 'हित गोविंद शरण महाराज' के दर्शन किए। करीब 30 मिनट तक वहां रुकने के बाद वे वापस अपने नए आश्रम लौट गए। महाराज की इस यात्रा के दौरान भक्त लगातार उनके दर्शन करते रहे। उनके लिए यह सिर्फ एक पदयात्रा नहीं, बल्कि लंबे समय बाद महाराज को इस तरह पैदल देखने का मौका था।

प्रेमानंद महाराज का VIDEO

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5 महीने से क्यों बंद थी पदयात्रा?

दरअसल, महाराज जी की दोनों किडनियां खराब हैं और हफ्ते में 2 से 3 बार उनका डायलिसिस होता है। खराब सेहत की वजह से ही 17 मई से उनकी पदयात्रा अनिश्चित काल के लिए रोक दी गई थी। तब महाराज जी ने एक वीडियो संदेश जारी करके कहा था- 'बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें या न मिलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। बिना बोले ही हम आपके दिमाग में रहेंगे।' हालांकि, बीच में 27 मई को उन्होंने एक बार पदयात्रा की थी, लेकिन उसके बाद से ये पूरी तरह बंद थी। पिछले महीने 25 सितंबर को इसी केली कुंज आश्रम में एक शिष्य रसिक दुलारी के सुसाइड की दुखद घटना हुई थी। इसके बाद महाराज जी 8 अक्टूबर को भी यहां 15 मिनट के लिए आए थे, लेकिन तब उन्होंने पदयात्रा नहीं की थी।

प्रेमानंद महाराज अब कहां रहते हैं?

मई 2026 से प्रेमानंद महाराज नए आश्रम 'यमुना विहार कुंज' में रह रहे हैं, जो केली कुंज से करीब 15 किलोमीटर दूर यमुना किनारे बना है। इस नए आश्रम में दो बड़े हॉल हैं, जहां सत्संग होता है। महाराज जी की सेहत को ध्यान में रखते हुए यहीं पर डायलिसिस की मशीन भी लगाई गई है, ताकि डॉक्टर्स समय पर उनका इलाज कर सकें।

भक्तों के लिए क्यों खास है महाराज जी की पदयात्रा?

प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा वृंदावन आने वाले कई भक्तों के लिए खास होती है। पहले महाराज तड़के पैदल निकलते थे, तो रास्ते में बड़ी संख्या में लोग उनके दर्शन के लिए खड़े रहते थे। स्वास्थ्य कारणों से पदयात्रा बंद होने के बाद भक्तों को इस तरह उनके दर्शन का इंतजार था। शुक्रवार को महाराज को पैदल चलते देख लोगों ने जयकारे लगाए और उनकी भावनाएं साफ देखने को मिलीं।