प्रेमानंद महाराज के एक भक्त का फोन चोरी होने पर चोर ने उसे लौटा दिया। चोर ने लॉक स्क्रीन पर महाराज की तस्वीर देखकर मन बदल लिया और खुद को भी उनका भक्त बताया। यह घटना विश्वास की शक्ति और संतों के प्रभाव को दर्शाती है।

संतों की शिक्षाओं में लोगों का मन बदलने की ताकत होती है। चोरों में भी भगवान को मानने वाले और उनकी पूजा करने वाले भक्त होते हैं। ऐसी कई घटनाएं हैं जहां चोरों का मन बदल गया। कई चोरों ने चोरी का सामान वापस भी किया है। अब प्रेमानंद महाराज के एक भक्त के साथ भी ऐसा ही हुआ है। भक्तों को जीवन का महत्व बताने वाले प्रेमानंद महाराज (Premananda Maharaja) की वजह से एक भक्त का मोबाइल फोन बच गया।

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बदल गया चोर का मन

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक व्यक्ति प्रेमानंद महाराज से बात कर रहा है। इसमें वह बता रहा है कि कैसे उसका चोरी हुआ मोबाइल वापस मिला। वीडियो के मुताबिक, एक चोर ने उस व्यक्ति का फोन चुरा लिया था। भक्त के मोबाइल की लॉक स्क्रीन पर प्रेमानंद महाराज की फोटो थी। जब चोर फोन अनलॉक करने की कोशिश कर रहा था, तो उसे प्रेमानंद महाराज की फोटो दिखी। भक्त के अनुसार, प्रेमानंद महाराज की शांत और दयालु तस्वीर का चोर पर गहरा असर हुआ। फोटो देखकर उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। चोर का मन चोरी का मोबाइल रखने का नहीं हुआ। मन बदलने के बाद चोर ने मोबाइल के असली मालिक से संपर्क किया और फोन सुरक्षित लौटा दिया। चोर ने कहा, 'मैं भी प्रेमानंद महाराज का भक्त हूं, इसलिए आपका मोबाइल बच गया।'

भक्त की यह बात सुनते ही प्रेमानंद महाराज हंसने लगे। उन्होंने कहा कि यह तो भगवान का खेल है। उनकी इस सादगी और मासूम मुस्कान ने भक्तों का दिल और भी जीत लिया। यह सुनकर प्रेमानंद महाराज के भक्त भावुक हो गए। लोग इसे मूल्यों की जीत और विश्वास की ताकत कह रहे हैं।

प्रेमानंद महाराज से मिलीं सिद्धू की पत्नी

प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि सेलिब्रिटी भी वृंदावन आ रहे हैं। हाल के दिनों में प्रेमानंद महाराज की प्रसिद्धि बढ़ती ही जा रही है। टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा भी अक्सर प्रेमानंद महाराज से मिलने आते रहते हैं। अब नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की है। अपने सुधार और समाज सेवा के बारे में नवजोत कौर के सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने जवाब दिया कि सिर्फ माला लेकर बैठना जरूरी नहीं है। अपने पद का सही इस्तेमाल करके जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।

जो समाज की सेवा करते हैं, भगवान उन्हें दिव्य भावना का आशीर्वाद देते हैं। अगर हम सौ रुपये समझदारी से खर्च करते हैं, तो हमारे पिता हमें हजार रुपये देते हैं। अगर हम हजार रुपये समझदारी से खर्च करते हैं, तो वे हमें एक लाख रुपये देते हैं। उसी तरह, हमें अपने पद का समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए और समाज में खुशियां लानी चाहिए।