अयोध्या राम मंदिर डोनेशन चोरी केस में SIT जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ। आरोपी ने दावा किया कि CCTV से बचने के लिए कैश वॉशरूम में छिपाया जाता था। अब करोड़ों के गबन और कथित मिलीभगत की जांच तेज़ है।
अयोध्या/लखनऊ: देश के सबसे सुरक्षित और आस्था के सबसे बड़े केंद्र, अयोध्या के राम मंदिर में हुए करोड़ों रुपये के कथित डोनेशन घोटाले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपियों में से एक ने पूछताछ के दौरान एक ऐसा खौफनाक और शातिराना खुलासा किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और मंदिर ट्रस्ट के होश उड़ा दिए हैं। आस्था की आड़ में रची गई इस साजिश का तरीका किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चोरी किए गए कैश को सीधे मंदिर परिसर से बाहर नहीं ले जाया जाता था, बल्कि पहले कुछ समय के लिए वॉशरूम में छिपाया जाता था। इसके बाद सही मौका देखकर रकम को बाहर निकाला जाता था ताकि किसी को शक न हो और CCTV कैमरों की नजर से भी बचा जा सके।

कैमरों के 'ब्लाइंड स्पॉट' और वॉशरूम का सीक्रेट: CCTV से कैसे बचे?
SIT की दो घंटे की कड़ी पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला ने जुर्म की वह दास्तान कबूल की, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। अविनाश ने बताया कि आरोपियों को मंदिर परिसर के कोने-कोने में लगे हाई-टेक सर्विलांस (CCTV) कैमरों की सटीक लोकेशन पता थी। चोरी को अंजाम देने के लिए वे एक सुनियोजित चक्रव्यूह रचते थे। जब दानपात्रों से चढ़ावे की गिनती हो रही होती थी, तब गैंग का एक सदस्य बड़ी चालाकी से नोटों की गड्डियां पार कर देता था। ठीक उसी वक्त, गैंग के बाकी सदस्य उसे चारों तरफ से इस तरह घेर लेते थे कि CCTV कैमरों की नज़र उस तक न पहुँच सके। इसके बाद, उस चोरी की रकम को तुरंत बाहर ले जाने के बजाय, परिसर के ही वॉशरूम में कुछ समय के लिए छिपा दिया जाता था। जैसे ही मौका मिलता, सुरक्षा जांच को चकमा देकर उस कैश को मंदिर परिसर से बाहर भेज दिया जाता था।
काउंटिंग रूम की चाबी किसके पास थी?
इस खेल में सबसे बड़ा सस्पेंस इस बात को लेकर है कि आखिर परिंदा भी जहां पर मार न सके, वहां इतनी बड़ी चोरी इतने लंबे समय तक बिना किसी रोक-टोक के कैसे चलती रही? जांचकर्ताओं के हाथ एक अहम सुराग लगा है-गिरफ्तार आरोपी रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव के पास डोनेशन काउंटिंग रूम की एक चाबी मौजूद थी। जबकि नियम के मुताबिक, दूसरी चाबी गिनती प्रक्रिया में शामिल बैंक कर्मचारियों के पास होनी चाहिए थी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा अधिकृत एक प्राइवेट एजेंसी की 14 लोगों की टीम इस गिनती को संभालती थी, जिसमें 11 बैंक कर्मचारी और 3 ट्रस्ट के सदस्य शामिल थे। SIT अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या रमाशंकर को यह चाबी देने में अंदर का ही कोई मोहरा शामिल था? क्या बैंक कर्मचारियों की इस महाघोटाले में मिलीभगत थी?
पूर्व ट्रस्टी का रसूख और दो बड़े इस्तीफों का कूटनीतिक भूचाल
अविनाश शुक्ला के बयानों ने मंदिर प्रशासन के बड़े चेहरों को भी जांच के दायरे में ला खड़ा किया है। शुक्ला ने दावा किया कि मिश्रा नाम के एक पदाधिकारी डोनेशन की गिनती की प्रक्रिया में बेहद अहम भूमिका निभाते थे। ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों के बेहद करीबी होने के कारण आरोपियों पर कभी कोई शक नहीं करता था और न ही उनकी कोई जांच-पड़ताल होती थी। इसी रसूख की आड़ में करोड़ों रुपये पार कर दिए गए। इस विवाद की आंच इतनी तेज थी कि पिछले ही हफ्ते मिश्रा और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक दोनों की किसी सीधी संलिप्तता का बयान सामने नहीं आया है, लेकिन SIT दोनों से कड़ी पूछताछ कर चुकी है।
आठ गिरफ्तारियां, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बाकी
इस मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT का गठन किया था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यदि कथित गबन हुआ, तो वह इतने लंबे समय तक बिना पकड़े कैसे चलता रहा और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे। फिलहाल, जांच जारी है और अभी तक किसी भी आरोपी के खिलाफ अदालत द्वारा दोष सिद्ध नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में SIT की जांच और फॉरेंसिक व वित्तीय विश्लेषण से यह स्पष्ट हो सकेगा कि डोनेशन के कथित गबन की पूरी सच्चाई क्या है।
काली कमाई से साम्राज्य: कहां ठिकाने लगाए करोड़ों रुपये?
SIT अब इस घोटाले के अंतिम छोर यानी 'मनी ट्रेल' को खंगाल रही है। पूछताछ में यह भी साफ हुआ है कि आस्था की तिजोरी से चुराए गए करोड़ों रुपये का इस्तेमाल आरोपियों ने अपने ऐशो-आराम और साम्राज्य खड़ा करने में किया। चोरी की इस रकम से भारी-भरकम जमीनों के सौदे किए गए और आलीशान घर खरीदे गए। 13 जून को गठित हुई SIT अब तक 8 लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। लेकिन सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल अब भी हवा में तैर रहा है-क्या 8 गिरफ्तारियां सिर्फ इस बड़ी व्हेल मछली की पूंछ भर हैं? इस सिंडिकेट में और कितने सफेदपोश चेहरे शामिल हैं, इसका सस्पेंस आने वाले दिनों में और गहराने वाला है।


