राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT को अब तक संपत्ति, डिजिटल सबूत और करोड़ों की कथित हेराफेरी से जुड़े अहम सुराग मिले हैं। आठ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या के राम मंदिर में दान की रकम में कथित हेराफेरी के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों की नजर में आए कई संदिग्धों की संपत्ति में पिछले कुछ समय में असामान्य बढ़ोतरी हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों की नेट वर्थ बहुत कम समय में करीब 100 गुना तक बढ़ गई। जांच के दौरान गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई अहम सुराग भी सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, कई संदिग्धों ने अपनी घोषित आय से कहीं अधिक कीमत की संपत्तियां खरीदीं। इनमें जमीन, रिहायशी प्लॉट और होटल जैसी महंगी प्रॉपर्टी शामिल हैं, जिन्हें उनकी कानूनी कमाई के आधार पर खरीदना मुश्किल माना जा रहा है।

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कैसे सामने आया दान चोरी का मामला?

सूत्रों का दावा है कि मंदिर के दान में हुई कथित चोरी का मामला तब सामने आया, जब संदिग्धों के बीच पैसों के बंटवारे को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद पूरे मामले की जांच तेज हुई और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने टिन्नू यादव समेत करीब 30 लोगों को जांच के दायरे में लिया।

डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश 

जांच में यह भी सामने आया कि जैसे ही संदिग्धों को चोरी की जांच की जानकारी मिली, उन्होंने डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश शुरू कर दी। सूत्रों के मुताबिक, कई आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट और अन्य जरूरी डेटा डिलीट कर दिया। कुछ लोगों ने तो अपने मोबाइल फोन पूरी तरह फॉर्मेट भी कर दिए, ताकि इलेक्ट्रॉनिक सबूत खत्म किए जा सकें।

CCTV और इलेक्ट्रॉनिक सबूत बने जांच का आधार

पुलिस ने इस मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सबसे महत्वपूर्ण आधार बनाया है। जांच एजेंसियां इन डिजिटल सबूतों की मदद से पूरे घटनाक्रम और कथित पैसों के लेन-देन की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।

मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के घेरे में

इस मामले के बाद राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल उठे हैं। सूत्रों के अनुसार, कंट्रोल रूम के प्रभारी और सुरक्षा कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि SIT की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।

ट्रस्ट से जुड़े अधिकारी भी जांच के घेरे में

जांच एजेंसियां सिर्फ आरोपियों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के प्रमुख अधिकारियों को अब तक किसी तरह की क्लीन चिट नहीं दी गई है। उनकी भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है।

राम मंदिर चोरी मामले में 8 आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। जांच एजेंसियां आरोपियों के घरों पर छापेमारी कर रही हैं और उनके पैसों के लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।

दान की रकम और गहनों की गिनती करते थे आरोपी

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान पेटी में डाले गए नकद और गहनों की गिनती करने वाली टीम का हिस्सा थे। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित हेराफेरी कितने समय से चल रही थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।

परिवार के सदस्यों से भी हो रही पूछताछ

जांच अधिकारी आरोपियों के परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ कर रहे हैं। साथ ही मंदिर के उद्घाटन के बाद से आरोपियों द्वारा खरीदी गई सभी चल और अचल संपत्तियों की सूची तैयार की जा रही है, ताकि उनकी आय और संपत्ति का मिलान किया जा सके।

चाची ने बताया- ट्रस्ट से जुड़ने के बाद बदल गई लाइफस्टाइल

आरोपी अनुकल्प मिश्रा की चाची नेहा मिश्रा ने पुलिस को बताया कि राम मंदिर ट्रस्ट के साथ काम शुरू करने के बाद अनुकल्प और उसके परिवार की जीवनशैली में काफी बदलाव आया था। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में करीब 7.75 करोड़ रुपये की दान राशि में कथित हेराफेरी हुई है। पुलिस अब तक 80 लाख रुपये बरामद करने का दावा कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि मंदिर के आठों कर्मचारियों की गतिविधियां सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई हैं। जांच एजेंसियां इन फुटेज की मदद से कथित हेराफेरी से जुड़े पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करने में जुटी हैं।

चंपत राय ने दिया नैतिक आधार पर इस्तीफा

इस सप्ताह की शुरुआत में राम मंदिर का प्रबंधन करने वाली संस्था 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के महासचिव चंपत राय ने चोरी की घटना के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की विस्तार से पड़ताल कर रही हैं।