अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। चढ़ावा और दान विवाद के बीच ट्रस्ट में बड़ा बदलाव हुआ है। जानिए इस्तीफे की वजह, आरोप, एफआईआर और आगे ट्रस्ट में क्या होने वाला है।
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। ट्रस्ट के गठन के करीब 75 महीने बाद महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ट्रस्ट चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में है।

हाल ही में ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें टिन्नू यादव का नाम भी शामिल है, जिन्हें चंपत राय का करीबी बताया जाता है। आरोप है कि चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई नियुक्तियां रिश्तेदारी के आधार पर हुईं।
कैसे बना था राम मंदिर ट्रस्ट?
सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। इस स्वतंत्र न्यास को मंदिर निर्माण, दान संग्रह, संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शुरुआत में ट्रस्ट में 15 सदस्य शामिल किए गए थे, जिनमें संत समाज, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों को जगह मिली थी।
चंपत राय की भूमिका क्यों रही अहम?
महासचिव होने के नाते ट्रस्ट के अधिकांश प्रशासनिक और संचालन संबंधी फैसलों में चंपत राय की अहम भूमिका मानी जाती रही। आरोप है कि कर्मचारियों की नियुक्ति और ट्रस्ट के दैनिक संचालन में पारदर्शिता की कमी रही। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
किन आरोपों से घिरा ट्रस्ट?
मौजूदा विवाद में मुख्य रूप से तीन सवाल उठ रहे हैं। पहला, ट्रस्ट के संचालन में पारदर्शिता की कमी। दूसरा, दान और चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड और रसीद व्यवस्था पर सवाल। तीसरा, ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों पर लगे आरोपों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं होने की चर्चा। इससे पहले वर्ष 2020-21 में भी ट्रस्ट पर जमीन खरीद से जुड़े विवाद सामने आए थे। हालांकि उस समय ट्रस्ट ने आरोपों से इनकार किया था।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट में अब तीन पद खाली हो गए हैं। निर्माण समिति का कार्यकाल भी समाप्ति की ओर है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और संरचना में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
ट्रस्ट के गठन के समय इसे एक स्वतंत्र न्यास घोषित किया गया था। ऐसे में नए सदस्यों की नियुक्ति और आगे के फैसले ट्रस्ट के नियमों और आंतरिक प्रक्रिया के अनुसार ही किए जाएंगे। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद ट्रस्ट में क्या नए बदलाव सामने आते हैं।


