Reservation Hatao Andolan: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने आरक्षण का समर्थन करते हुए इसे एक संवैधानिक अधिकार बताया है. उन्होंने साफ कहा कि आरक्षण किसी के मांगने से खत्म होने वाली चीज नहीं है.
Chirag Paswan on Reservation: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के तहत सैकड़ों लोगों ने आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण में बदलाव, आर्थिक आधार को अधिक महत्व देने और सरकारी सहायता की व्यवस्था को नए सिरे से तय करने की मांग उठाई। इसी बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण व्यवस्था का समर्थन करते हुए इसे संविधान से मिला अधिकार बताया।
‘आरक्षण खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार’
बिहार में पत्रकारों से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि केवल किसी के मांग करने से आरक्षण खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण किसी व्यक्ति या समुदाय को दी जाने वाली खैरात नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक अधिकार है। इसका उद्देश्य उन समुदायों को समाज की मुख्यधारा में लाना रहा है, जिन्होंने लंबे समय तक सामाजिक और जातिगत भेदभाव का सामना किया है।
SC-ST समुदायों के लिए क्यों बनाया गया प्रावधान?
चिराग पासवान ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का उदाहरण देते हुए कहा कि इन समुदायों को संविधान में सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों की पहचान ऐतिहासिक रूप से छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के आधार पर हुई, जबकि अनुसूचित जनजातियों की अपनी अलग जीवनशैली, भाषा, पहनावा और परंपराएं हैं। इन समुदायों को मुख्यधारा में लाने के लिए संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया।
आंबेडकर के संविधान में शामिल हुआ आरक्षण
पासवान ने कहा कि संविधान निर्माण के दौरान बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को संविधान का हिस्सा बनाया गया। समय के साथ इन प्रावधानों को मजबूत और विस्तारित किया गया। उन्होंने कहा कि आज आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों यानी EWS के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था मौजूद है, जिससे आर्थिक आधार पर कमजोर लोगों को लाभ मिल रहा है।
सरकार बातचीत के लिए तैयार
आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बातचीत करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी अपनी मांगों को व्यवस्थित तरीके से सरकार के सामने रखें, जिसके बाद संवाद के जरिए मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी समाज के बड़े वर्ग में असंतोष पैदा कर सकती है।
क्या हैं ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ की मांगें?
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि सरकारी सहायता और आरक्षण से जुड़े फैसलों में आर्थिक स्थिति को अधिक महत्व दिया जाए। शिक्षा, कोचिंग, स्कॉलरशिप और अन्य खर्चों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ज्यादा सहायता देने की मांग की गई है। YouTuber अजीत भारती ने ‘कोटा के भीतर कोटा’ की मांग उठाई और क्रीमी लेयर को लेकर भी सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की।
आरक्षण पर व्हाइट पेपर की मांग
आंदोलनकारियों ने पिछले करीब आठ दशकों में आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव की समीक्षा के लिए सरकार से व्हाइट पेपर जारी करने की मांग भी की है। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए न्यूनतम अंकों की व्यवस्था बनाए रखने और EWS वर्ग को फीस, हॉस्टल और अन्य सुविधाओं में अधिक राहत देने की मांग उठाई गई है। अब सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें रहेंगी।