Russia Oil Profit 2026: ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव दिख रहा है। खाड़ी देशों से सप्लाई प्रभावित होने के कारण रूस तेल बेचकर रोज़ करीब 71 अरब रुपये कमा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत और चीन जैसे देशों ने भी रूस से तेल खरीद बढ़ा दी है।

Russia Oil Sales During Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झटका दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच पिछले 27 दिनों से चल रहे संघर्ष का असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप से लेकर दक्षिण एशिया तक ऊर्जा बाजार पर इसका दबाव महसूस किया जा रहा है।

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इस बीच एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। जहां कई देश तेल संकट और महंगाई से जूझ रहे हैं, वहीं रूस इस हालात में बड़ी कमाई करता दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक रूस इन दिनों तेल बेचकर रोज़ाना करीब 71 अरब रुपये तक कमा रहा है।

युद्ध के बीच रूस की तेल बिक्री में उछाल

ब्रिटेन के अखबार द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा हालात में रूस मार्च महीने में लगभग 24 अरब डॉलर का तेल बेच सकता है। अगर रोज़ाना की कमाई देखें तो यह करीब 760 मिलियन डॉलर प्रतिदिन बैठती है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 71 अरब रुपये के आसपास है।

पिछले तीन वर्षों में यह रूस की तेल बिक्री से होने वाली सबसे बड़ी कमाई मानी जा रही है। दरअसल, साल 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। इससे रूस की ऊर्जा निर्यात पर असर पड़ा था। लेकिन मौजूदा हालात ने रूस को फिर से बड़ा बाजार दे दिया है।

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रूस की कमाई अचानक क्यों बढ़ी?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस समय तीन बड़े कारण रूस की तेल कमाई को बढ़ा रहे हैं।

  1. पहला कारण: ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के चलते खाड़ी क्षेत्र का सबसे अहम समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट लगभग ठप हो गया है। इस रास्ते से जहाज सीमित शर्तों के साथ गुजर रहे हैं, जिससे खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में कई देशों ने रूस से तेल खरीदना शुरू कर दिया है।
  2. दूसरा कारण: युद्ध से पहले रूस कई देशों को तेल कम कीमत पर बेच रहा था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के मुताबिक इस समय रूसी तेल लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बिक रहा है। कीमत बढ़ने से रूस की कमाई में अचानक उछाल आया है।
  3. तीसरा कारण: भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों ने भी रूस से तेल खरीद बढ़ा दी है। आंकड़ों के मुताबिक भारत ने फरवरी 2026 की तुलना में मार्च 2026 में रूस से करीब 72 प्रतिशत ज्यादा तेल खरीदने का फैसला किया है। इससे रूस की कुल बिक्री में और तेजी आई है।

जंग में ईरान को मदद देने के आरोप

इस संघर्ष के बीच रूस की भूमिका को लेकर भी कई तरह की रिपोर्ट सामने आ रही हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस कथित तौर पर ईरान को खाद्य सामग्री के साथ ड्रोन और हथियार उपलब्ध करा रहा है।

कुछ पश्चिमी खुफिया अधिकारियों का दावा है कि रूस सैटेलाइट के जरिए इजराइल और अमेरिकी ठिकानों की जानकारी जुटाकर ईरान को दे रहा है। कहा जा रहा है कि इन्हीं जानकारियों के आधार पर ईरान मिसाइल हमलों की योजना बनाता है। हालांकि रूस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। रूस का कहना है कि उसने युद्ध के दौरान ईरान को सिर्फ मानवीय सहायता के तहत कुछ जरूरी दवाइयां भेजी हैं।

वैश्विक तेल बाजार पर बढ़ता असर

एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अगर लंबा चलता है तो इसका असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से कई देशों की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका है। फिलहाल स्थिति यह है कि जहां कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, वहीं रूस के लिए यह दौर तेल निर्यात के लिहाज से काफी फायदे का साबित हो रहा है।

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