Russia Oil Ban Impact India: रूस के पेट्रोल एक्सपोर्ट बैन ने दुनियाभर में तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है, लेकिन भारत के लिए घबराने वाली बात नहीं है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है और रूस हमारा नंबर-1 सप्लायर है, इसलिए सरकार ने पहले ही 6 करोड़ बैरल तेल का बैकअप प्लान तैयार कर लिया है। 

Russia Petrol Export Ban Impact Explained: दुनियाभर में तेल के बाजार में एक बार फिर हलचल मच गई है। खबर आई है कि रूस ने 1 अप्रैल से लेकर 31 जुलाई तक पेट्रोल के निर्यात (एक्सपोर्ट) पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया है। रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। रूस का कहना है कि यह कदम उन्होंने अपने देश में सप्लाई सही रखने और कीमतों को काबू में रखने के लिए उठाया है। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस फैसले से क्या भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे? आइए जानते हैं यह फैसला भारत के लिए टेंशन वाला क्यों नहीं है?

भारत के लिए अच्छी खबर क्या है?

बहुत से लोगों को लग रहा है कि रूस से पेट्रोल पर रोक लगाने से भारत में पेट्रोल के रेट बढ़ जाएंगे, तो ऐसा नहीं है। भारत रूस से पेट्रोल नहीं खरीदता है। हमारे देश का एक बहुत बड़ा रिफाइनरी नेटवर्क है, जो कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) खरीदकर उसे पेट्रोल और डीजल में बदलता है। भारत हर दिन करीब 56 लाख बैरल कच्चा तेल रिफाइन करता है। इसलिए, रूस के तैयार पेट्रोल बैन का भारत पर कोई सीधा असर नहीं पड़ने वाला है। इससे आपकी जेब पर भी कोई असर नहीं होने वाला है।

भारत के लिए बुरी खबर क्यों है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों में से एक है। अगर उसके बैन से ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई कम होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। अभी भी ईरान-इजराइल जंग की वजह से कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के आसपास चल रहा है। अगर यह और महंगा हुआ, तो भारतीय रिफाइनरियों को तेल खरीदना महंगा पड़ेगा, जिसका बोझ आपकी जेब पर आ सकता है।

भारत किस देश से कितना कच्चा तेल खरीदता है? (फरवरी 2026 तक के आंकड़ें)

रूस: 22%

सऊदी अरब: 21%

इराक: 20%

UAE: 10%

अमेरिका: 7%

अन्य: 19%

रूस से भारत को तेल सस्ता मिलता है या महंगा?

मिडिल-ईस्ट में जंग शुरू होने के बाद भारत को रूस से तेल बहुत सस्ते दामों (डिस्काउंट) पर मिल रहा था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। सप्लाई की कमी और बढ़ती मांग के कारण, भारत अब रूसी तेल के लिए ज्यादा कीमत (Premium) चुका रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रीमियम ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर $5 से $15 प्रति बैरल तक ज्यादा है। इसे ऐसे समझें कि अगर पहले रूस का तेल 100 डॉलर में मिल रहा था, तो अब उसी के लिए भारत को 105 से 115 डॉलर चुकाने पड़ रहे हैं। इसका मतलब है कि तेल आयात करने का हमारा बिल बढ़ गया है।

भारत का बैकअप प्लान तैयार

इजराइल-ईरान जंग की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है। इससे निपटने के लिए, भारतीय रिफाइनर्स ने रूस से और तेल खरीदने का फैसला किया है। अप्रैल महीने की डिलीवरी के लिए भारत ने रूस से करीब 60 मिलियन (6 करोड़) बैरल कच्चे तेल का बड़ा सौदा किया है। यह कदम देश में ईंधन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।