रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली के बाद संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर हमला बोला। 10 लाख की भीड़ के दावे, 2024 चुनाव और 1984 के दंगों को लेकर कई सवाल उठाए।
दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली के बाद अब सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस और राहुल गांधी ने जहां चुनाव आयोग और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सरकार को घेरा, वहीं बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने रैली के दावों और राहुल गांधी के भाषण पर सवालों की बौछार कर दी। उन्होंने 10 लाख लोगों की भीड़ के दावे से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव की वैधता तक, कई मुद्दों पर कांग्रेस को घेरा।
'कहां थे 10 लाख लोग?' भीड़ के दावे पर सवाल
संबित पात्रा ने दावा किया कि INDIA गठबंधन ने रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने की बात कही थी, लेकिन रामलीला मैदान में वैसी भीड़ नजर नहीं आई। उन्होंने कहा कि मैदान का करीब 40 फीसदी हिस्सा खाली था। पात्रा के मुताबिक, 28 हजार कुर्सियों में से दोपहर 3:30 से 4 बजे के बीच करीब 5 से 7 हजार कुर्सियां खाली थीं। ये आंकड़े बीजेपी सांसद के अपने दावे हैं।
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राहुल गांधी के भाषण को बताया समय की बर्बादी
पात्रा ने राहुल गांधी के संबोधन पर तंज कसते हुए कहा कि सुबह से रैली पर नजर रखने के बाद उन्हें पूरा आयोजन समय की बर्बादी लगा। प्रधानमंत्री पद को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल दावे नहीं, बल्कि मेहनत और परिश्रम की जरूरत होती है।
2024 के चुनाव को अवैध बताने पर घेरा
राहुल गांधी के 2024 के लोकसभा चुनाव को अवैध बताने वाले बयान पर पात्रा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार उस समय मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे। पात्रा ने कांग्रेस से पूछा कि अगर चुनाव में गड़बड़ी थी, तो उसे अदालत में चुनौती क्यों नहीं दी गई? उन्होंने चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका दिखाने की मांग भी की।
'यह भारत राहुल गांधी के परिवार का नहीं'
बीजेपी सांसद ने राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत किसी परिवार का नहीं, बल्कि देश के लोगों का है। पात्रा ने चाय बेचने वाले के प्रधानमंत्री और सामान्य पृष्ठभूमि के व्यक्ति के गृह मंत्री बनने का उदाहरण देते हुए कांग्रेस पर तंज कसा। राहुल गांधी के शिव की बारात वाले बयान पर भी उन्होंने पलटवार किया।
1984 के दंगों और विदेश यात्राओं का भी उठाया मुद्दा
पात्रा ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और खरीदारी को लेकर भी निशाना साधा। इसके अलावा उन्होंने 1 नवंबर को रैली आयोजित करने पर सवाल उठाते हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवारों की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा गया। राजीव गांधी के ‘बड़ा पेड़ गिरने’ वाले बयान का जिक्र करते हुए भी उन्होंने कांग्रेस को घेरा। इस तरह बीजेपी ने विपक्ष की रैली के जवाब में भीड़, चुनावी वैधता और 1984 के दंगों को लेकर राजनीतिक हमला तेज कर दिया।
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