रामलीला मैदान में तेजस्वी यादव का महाभारत वाला वार! उन्होंने पूछा- 'शकुनि कौन और पासा कौन?' इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए देशद्रोह का मुकदमा चलाने और जेल भेजने की मांग कर दी। TCS सॉफ्टवेयर टेंडर पर भी सवाल उठाए।
दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली में बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण से सियासी पारा चढ़ा दिया। महाभारत के शकुनि और पासे का जिक्र करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। तेजस्वी ने यहां तक मांग कर दी कि ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।
रामलीला मैदान में महाभारत का जिक्र
तेजस्वी यादव ने कहा कि रामलीला मैदान में आमतौर पर रामायण की चर्चा होती है, लेकिन आज यहां ‘वोट चोरों’ के खिलाफ महाभारत का आयोजन हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और विपक्ष को इसके खिलाफ कुरुक्षेत्र की लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
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'शकुनि कौन और पासा कौन है?'
अपने भाषण में तेजस्वी ने महाभारत के शकुनि और उसके पासे का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह शकुनि का पासा उसके इशारे पर चलता था और खेल निष्पक्ष नहीं होता था, उसी तरह आज चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। इसके बाद उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए उन्हें इस उदाहरण से जोड़ा।
ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग
तेजस्वी यादव ने कहा कि ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। उनका आरोप था कि लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। ये तेजस्वी यादव के राजनीतिक आरोप और मांगें हैं, किसी अदालत का निष्कर्ष नहीं।
चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर और टेंडर पर उठाए सवाल
आरजेडी नेता ने चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कथित गड़बड़ी और ‘सेटिंग-गेटिंग’ का आरोप लगाते हुए पूछा कि TCS के सॉफ्टवेयर का टेंडर हुआ था या नहीं। अगर टेंडर जारी किया गया, तो उससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे? उन्होंने इन सवालों पर पारदर्शिता की मांग की।
'कठपुतली बन चुकी संस्थाएं सबसे खतरनाक'
तेजस्वी ने कहा कि लोकतंत्र के लिए केवल तानाशाही ही खतरा नहीं है, बल्कि सरकार की कठपुतली बन चुकी संस्थाएं भी गंभीर चुनौती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहीं। उनका भाषण SIR और मतदाता सूची से जुड़े विपक्ष के विरोध को और तीखा करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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