क्या सिद्धारमैया का इस्तीफ़ा कर्नाटक में सत्ता का सबसे बड़ा उलटफेर साबित होगा? क्या डी.के. शिवकुमार बनने जा रहे हैं अगले मुख्यमंत्री? क्या कांग्रेस का “रोटेशनल CM फ़ॉर्मूला” अब सच साबित होने वाला है? क्या हाईकमान के गुप्त फैसले से कांग्रेस में नया सियासी भूचाल आएगा?
Karnataka CM Change: कर्नाटक के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। पिछले कई महीनों से चल रही अंदरूनी खींचतान और अटकलों पर अब पूरी तरह से विराम लग गया है। कर्नाटक की राजनीति में एक बहुत बड़ा भूचाल आ चुका है, क्योंकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा अब पूरी तरह तय हो चुका है। कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने खुद इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि सिद्धारमैया अपने पद से हटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

'लास्ट सपर' या विदाई का नाश्ता? गृह मंत्री की जुबानी पूरी कहानी
- गुरुवार सुबह कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अचानक सभी कैबिनेट सहयोगियों के लिए एक ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ की घोषणा की।
- इस बैठक के पीछे के गुप्त मकसद का खुलासा करते हुए गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा, "मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को नाश्ते पर बुलाया है।
- इस्तीफा देने से पहले, वह सभी मंत्रियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं।"
- परमेश्वर ने यह भी जोड़ा कि सिद्धारमैया को दिल्ली में कोई बड़ा पद मिलेगा या नहीं, यह पूरी तरह कांग्रेस आलाकमान के हाथ में है।
दिल्ली में लिखी गई पटकथा: डी.के. शिवकुमार के लिए रास्ता साफ!
- इस हाई-प्रोफाइल तख्तापलट की पटकथा असल में इस हफ्ते की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लिखी गई थी।
- सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को दोटूक शब्दों में डी.के. शिवकुमार के लिए कुर्सी खाली करने का आदेश दे दिया है।
- शिवकुमार के समर्थक पिछले लंबे समय से अड़े हुए थे कि मई 2023 के विधानसभा चुनाव की ऐतिहासिक जीत के बाद जो 'रोटेशनल मुख्यमंत्री फॉर्मूला' (बारी-बारी से सीएम बनने का गुप्त समझौता) तय हुआ था, उसे अब लागू करने का वक्त आ गया है।
'जस्ट वेट एंड वॉच': जमीन पर बगावत का खतरा और परमेश्वर की चेतावनी
जब गृह मंत्री जी. परमेश्वर से मीडिया ने तीखा सवाल पूछा कि सिद्धारमैया जैसे कद्दावर और जनाधार वाले नेता को अचानक मुख्यमंत्री पद से हटाने के जमीन पर क्या परिणाम होंगे? क्या राज्य में कांग्रेस के भीतर कोई बड़ी बगावत भड़क सकती है? इस पर परमेश्वर ने रहस्यमयी मुस्कान के साथ सिर्फ चार शब्द कहे- "बस इंतज़ार करो और देखो (Just wait and watch)!" उनके इस छोटे से बयान ने कर्नाटक की राजनीति में सस्पेंस को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिन बेहद अशांत हो सकते हैं।
महा-संकट: जब सूबे में आग लगी हो और राज्यपाल ही गायब हों!
सिद्धारमैया ने एक तरफ कैबिनेट मंत्रियों को विदा करने का मन बना लिया है और दूसरी तरफ राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय मांगा है। इस ड्रामे में सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत इस वक्त एक पारिवारिक आपात स्थिति (Family Emergency) के कारण कर्नाटक से बाहर हैं। अब संकट यह है कि मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा किसे सौंपेंगे? हालांकि संवैधानिक नियमों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा राज्यपाल के सचिवालय में या फिर फैक्स और ईमेल के जरिए भी भेज सकते हैं, लेकिन राज्यपाल की अनुपस्थिति ने इस पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से बेहद पेचीदा और रोमांचक बना दिया है।
कांग्रेस का सार्वजनिक इनकार और परदे के पीछे का सच
हैरानी की बात यह है कि जहां एक तरफ गृह मंत्री खुलेआम इस्तीफे की बात स्वीकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी लगातार सार्वजनिक मंचों पर किसी भी नेतृत्व परिवर्तन की बात से इनकार कर रही है। पार्टी का दावा था कि हालिया बैठकें केवल आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों की रणनीति के लिए थीं। लेकिन अब परदे के पीछे का सच पूरी तरह बाहर आ चुका है। देखना यह होगा कि सिद्धारमैया के राजभवन कूच करने के बाद, क्या डी.के. शिवकुमार बिना किसी विरोध के कर्नाटक के नए 'कैप्टन' बन पाते हैं, या फिर यह नाटक अभी कोई नया मोड़ लेने वाला है।


