सीतापुर जिला कारागार में भी निभाई गई करवा चौथ की परंपरा। 27 महिला बंदियों ने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखा, जबकि 17 को अपने पतियों से मिलने का मौका मिला। सलाखों के पीछे भी आस्था और रिश्तों की डोर कायम रही।

करवा चौथ पर सुहाग की सलामती के लिए महिलाएं चांद का इंतजार करती हैं। लेकिन सीतापुर जिला कारागार में इस बार यह परंपरा कुछ अलग भावनाओं के बीच निभाई गई। जेल की चारदीवारी के पीछे रह रहीं 27 महिला बंदियों ने अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा। इनमें से 17 महिला बंदियों को अपने पतियों के दीदार करने का मौका मिला। सलाखों के पीछे मनाया गया यह पर्व आस्था, रिश्तों और अपनों से मिलने की भावनाओं से जुड़ा रहा।

जेल में रहकर भी नहीं टूटी करवा चौथ की परंपरा

सीतापुर जिला कारागार में करवा चौथ के अवसर पर 27 महिला बंदियों ने निर्जला व्रत रखा। आमतौर पर इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। इन महिला बंदियों ने भी जेल में रहते हुए अपनी परंपरा निभाई। परिस्थितियां भले ही सामान्य जीवन से अलग थीं, लेकिन पति की सलामती की कामना उनके लिए उतनी ही महत्वपूर्ण रही।

यह भी पढ़ें : आसिम मुनीर ईरान में, ख्वाजा आसिफ संसद में! मौलाना ने ऐसा क्या कहा कि गूंजने लगे ठहाके?

17 महिला बंदियों ने किए पति के दीदार

इस करवा चौथ पर 17 महिला बंदियों को अपने पतियों से मिलने का अवसर मिला। जेल में बंद होने के बावजूद पति-पत्नी के बीच मुलाकात ने पर्व को भावनात्मक रूप दिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि सभी 17 मुलाकातें किस व्यवस्था के तहत कराई गईं। बाकी महिला बंदियों के लिए भी यह दिन अपने परिवार और जीवनसाथी की यादों से जुड़ा रहा।

जेल प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम

जेल अधीक्षक प्रीति यादव के मुताबिक, करवा चौथ के अवसर पर 27 महिला बंदियों ने निर्जला व्रत रखा। उन्होंने बताया कि पर्व को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन की ओर से विशेष बंदोबस्त किए गए थे। जेल परिसर में मनाया गया यह त्योहार दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी लोगों के लिए आस्था और पारिवारिक रिश्तों का महत्व बना रहता है।

यह भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल में बच्चों को बांटी गईं आसाराम से जुड़ी पुस्तिकाएं! प्राचार्य पर गिरी गाज