Sonam Wangchuk News: 15 अगस्त से ठीक पहले सोनम वांगचुक ने एक वीडियो मेसेज जारी किया है. इसमें उन्होंने नेता चुनने के मौजूदा सिस्टम में बड़े बदलाव की बात कही है. उनका कहना है कि 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के लिए अच्छे चरित्र वाले, निडर और निस्वार्थ लोगों को आगे आना होगा.

Sonam Wangchuk Second Freedom Movement: स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देश के भविष्य और नेतृत्व को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने भारत में नेतृत्व चुनने की प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की जरूरत बताते हुए ‘शांतिपूर्ण क्रांति’ और ‘भारत के दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन’ का आह्वान किया है। वांगचुक ने लोगों से ऐसे निस्वार्थ, निर्भीक और चरित्रवान लोगों के नाम सुझाने की अपील की, जो देश को नई दिशा देने की क्षमता रखते हों।

2047 के भारत को लेकर जताई चिंता

अपने वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी और इस दौरान उन्होंने देश के भविष्य को लेकर गंभीरता से विचार किया। उन्होंने कहा कि जिन देशों को कभी भारत के बराबर या पीछे माना जाता था, वे आज विकास के कई क्षेत्रों में आगे निकल चुके हैं। उनके मुताबिक, अगर विकास और प्रति व्यक्ति आय की मौजूदा स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आया तो 2047 तक भारत उस मुकाम पर नहीं पहुंच पाएगा, जिसकी देशवासी उम्मीद कर रहे हैं।

शिक्षा को बताया देश के विकास की सबसे बड़ी कुंजी

वांगचुक ने भारत के विकास को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक देश की प्रगति भी सीमित रहेगी। उन्होंने हाल के महीनों में बदलाव की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।

समस्या सिर्फ राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं

सोनम वांगचुक ने कहा कि देश की मौजूदा समस्याओं को केवल किसी एक राजनीतिक दल के नजरिए से देखने से समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग दलों की सरकारों के दौरान भी विरोध की आवाजों को दबाए जाने के उदाहरण सामने आए हैं। इसलिए उनके मुताबिक, यह किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं बल्कि व्यवस्था से जुड़ी एक व्यापक समस्या है।

2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का किया जिक्र

वांगचुक ने अपने संदेश में 2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस आंदोलन के बाद देश की राजनीति में बदलाव जरूर आया, लेकिन भ्रष्टाचार और अन्य समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। उनके अनुसार, समय के साथ भ्रष्टाचार और अन्याय ने नए रूप ले लिए हैं और कई मामलों में चुनौतियां पहले से भी गंभीर हो गई हैं।

‘देश को चाहिए शांतिपूर्ण क्रांति’

सोनम वांगचुक ने कहा कि भारत को आगे बढ़ाने के लिए नेतृत्व चुनने की व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है। उन्होंने इसे एक ऐसी ‘शांतिपूर्ण क्रांति’ की आवश्यकता बताया, जिससे देश को सही नेतृत्व मिल सके। उनका कहना है कि जब तक देश में सही नेतृत्व का चयन नहीं होगा, तब तक विकास और शासन की दिशा में अपेक्षित बदलाव लाना मुश्किल रहेगा।

Scroll to load tweet…

नागरिकों से अच्छे नेतृत्व के लिए मांगे नाम

लद्दाख में रहने वाले वांगचुक ने देशभर के ऐसे लोगों को एक मंच पर लाने की इच्छा जताई, जो राष्ट्रहित में सोचते हैं और बदलाव के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपने क्षेत्र से कम से कम एक ऐसे व्यक्ति का नाम सुझाने को कहा, जो निस्वार्थ, निर्भीक और चरित्रवान हो।

देशभर में यात्रा कर लोगों से संवाद की तैयारी

वांगचुक ने कहा कि वह केवल बुद्धिजीवियों को सामने लाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं जिनमें नेतृत्व क्षमता, नैतिकता और समाज के लिए काम करने का जज्बा हो। उन्होंने आने वाले समय में विभिन्न राज्यों और शहरों की यात्रा कर लोगों से सीधे संवाद करने और उनकी राय जानने की इच्छा भी जताई।

‘भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन’ शुरू करने की अपील

अपने सोशल मीडिया संदेश के अंत में सोनम वांगचुक ने लोगों से ‘भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन’ शुरू करने का आह्वान किया। उन्होंने अपील की कि उनके संदेश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए और इसे विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी साझा किया जाए। उनका जोर शांतिपूर्ण तरीके से देश की व्यवस्था और नेतृत्व में व्यापक बदलाव की मांग पर रहा।