सोनिया गांधी की किताब 'बिलोंगिंग' पर विवाद। पब्लिशर पेंगुइन ने सरकारी दबाव के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वकीलों के सुझावों को सोनिया गांधी ने मानने से इनकार कर दिया था।
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की किताब को लेकर चल रहे विवाद में पब्लिशिंग हाउस पेंगुइन ने एक बार फिर अपनी सफाई दी है। पेंगुइन हाउस ने साफ कहा है कि उनकी किताब 'बिलोंगिंग' (Belonging) से किसी भी हिस्से को हटाने के लिए कोई बाहरी दबाव नहीं था। पब्लिशर का कहना है कि कंपनी के वकीलों ने सोनिया गांधी के सहयोगियों के साथ कई दौर की बातचीत की थी। लेकिन आखिर में सोनिया गांधी ने वकीलों के सुझावों को मानने से इनकार कर दिया। खबरों के मुताबिक, वकीलों ने गलवान संघर्ष, मोदी सरकार के कुछ कामकाज, RSS और भारत में दंगों और अल्पसंख्यकों की स्थिति से जुड़े हिस्सों पर आपत्ति जताई थी और बदलाव के सुझाव दिए थे।
ये पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पब्लिशर ने सोनिया गांधी की आत्मकथा से कुछ हिस्से हटाने को कहा था। कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने आरोप लगाया था कि पेंगुइन हाउस ने RSS और पीएम मोदी से जुड़े हिस्से हटाने का सुझाव दिया था। गहलोत ने यह भी कहा था कि पब्लिशर ने चीनी घुसपैठ से जुड़ा हिस्सा भी हटाने को कहा था। उन्होंने दावा किया कि 2015 में नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के बीच हुई एक बैठक के ब्यौरे पर भी पब्लिशर ने शक जताया था। गहलोत का आरोप था कि सरकार के दबाव की वजह से पब्लिशर ने ये बदलाव करने को कहा। इन्हीं आरोपों के बाद पेंगुइन हाउस ने एक बार फिर अपना पक्ष रखा है।
इससे पहले भी पेंगुइन हाउस ने एक बयान जारी किया था। उसमें कहा गया था कि एक पब्लिशर के तौर पर तथ्यों की जांच करना और किताब के हित में लेखक को सुझाव देना उनका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है। यह पब्लिशिंग प्रोसेस का एक सामान्य हिस्सा है। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने हमेशा यही कहा कि वे इस किताब को छापने के लिए तैयार और इच्छुक हैं। हालांकि, पब्लिशर ने यह भी साफ कर दिया कि वे लेखक के साथ हुई बातचीत पर और कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।


