Uttar Pradesh Politics: समाजवादी पार्टी के सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने राहुल गांधी पर अमेठी से भागने का आरोप लगाया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच तनातनी चल रही है।
Rahul Gandhi Amethi: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ती नजर आ रही है। इसी बीच सपा के राज्यसभा सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी का कोई मजबूत जमीनी जनाधार नहीं है और पिछले लोकसभा चुनाव में वह अमेठी से चुनाव लड़ने से पीछे हट गए थे।
एएनआई से बातचीत में शिवपाल ने कहा कि राहुल गांधी पहले अमेठी से चुनाव हार चुके थे, इसलिए उन्होंने वहां से चुनाव नहीं लड़ा। उनके मुताबिक, राहुल गांधी को रायबरेली से चुनाव लड़ने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मनाया था।
‘राहुल गांधी का यूपी में जनाधार नहीं’
शिवपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जमीनी स्थिति कांग्रेस के पक्ष में नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के रायबरेली से चुनाव लड़ने के फैसले में अखिलेश यादव की भी भूमिका रही थी। शिवपाल के अनुसार, अखिलेश ने कांग्रेस नेता को रायबरेली से चुनाव लड़ने के लिए समझाया और सपा कार्यकर्ताओं से उनके समर्थन में वोट करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस नेतृत्व चुनाव में सपा के समर्थन पर निर्भर रहा है, तो इससे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सीमित जनाधार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
150 सीटों की मांग पर भड़के शिवपाल
कांग्रेस की ओर से 2027 के विधानसभा चुनाव में 150 सीटों की मांग किए जाने की खबरों पर भी शिवपाल ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की मांग गठबंधन की भावना के खिलाफ है।
शिवपाल ने दावा किया कि मौजूदा विधानसभा संख्या के हिसाब से कांग्रेस के पास सिर्फ दो विधायक हैं, जबकि सपा के पास 125 विधायक हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी वास्तविक राजनीतिक ताकत के हिसाब से सीटों की मांग करनी चाहिए।
उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस की क्षमता करीब 25 से 30 सीटों की है। हालांकि, शिवपाल ने यह भी कहा कि सपा कांग्रेस को 50 सीटें तक दे सकती है, लेकिन इससे ज्यादा सीटें देना उनके अनुसार चुनावी जोखिम बढ़ा सकता है।
2024 के लोकसभा चुनाव का दिया उदाहरण
शिवपाल ने 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में 17 सीटें दी गई थीं, लेकिन पार्टी इनमें से केवल छह सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। उन्होंने 2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस गठबंधन से सपा को नुकसान हुआ था और पार्टी को कई सीटें गंवानी पड़ी थीं।
अखिलेश ने नेताओं को दी नसीहत
शिवपाल के बयान के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी नेताओं से सीट बंटवारे और कांग्रेस को लेकर अपनी राय सार्वजनिक मंचों पर रखने के बजाय पार्टी के आंतरिक मंच पर रखने की अपील की।
अखिलेश ने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर नेताओं की जो भी राय या चिंता है, उसे पार्टी नेतृत्व के साथ साझा किया जाना चाहिए। इससे संकेत मिलता है कि गठबंधन को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी पर सपा नेतृत्व फिलहाल नियंत्रण रखना चाहता है।
कांग्रेस ने कहा- राष्ट्रीय स्तर पर होगा फैसला
वहीं, यूपी कांग्रेस की नवनियुक्त अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने राज्य स्तर पर हो रही बयानबाजी को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा कि सीट बंटवारे का फैसला इंडिया गठबंधन के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से किया जाएगा।
इससे पहले यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि अक्टूबर में सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस के पास सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार मौजूद हैं और पार्टी गठबंधन में 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी।
2027 से पहले गठबंधन की राह आसान नहीं
सपा और कांग्रेस ने 2024 का लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत लड़ा था। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण होगी।
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 403 में से 255 सीटें जीती थीं, जबकि सपा को 111 सीटें मिली थीं। कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई थी। ऐसे में 2027 से पहले सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय करना सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
