SpaceX Starship Launch: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का सुपर हेवी रॉकेट 'स्टारशिप' अपनी 14वीं उड़ान के लिए तैयार है। यह इसका पहला ऑर्बिटल मिशन होगा। इस लॉन्च के जरिए नेक्स्ट-जेनरेशन स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, जिससे दुनियाभर में इंटरनेट स्पीड और बेहतर होगी।

Starship Flight 14: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) का सुपर हेवी रॉकेट 'स्टारशिप' आज अपनी 14वीं उड़ान भरने जा रहा है। इसका लॉन्च विंडो 75 मिनट का है, जो सेंट्रल टाइम के मुताबिक सुबह 7:15 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 5:45 बजे) खुलेगा।

स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स की तैनाती और खासियत

स्पेसएक्स के मुताबिक, यह पहली बार है जब स्टारशिप को धरती के ऑर्बिट (कक्षा) में भेजा जा रहा है। इस मिशन के जरिए पहली बार स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स को भी अंतरिक्ष में तैनात किया जाएगा। कंपनी का दावा है कि इससे दुनियाभर में इंटरनेट की स्पीड और कनेक्टिविटी पहले से कहीं ज्यादा तेज और भरोसेमंद हो जाएगी।

स्टारलिंक V3 एक नेक्स्ट-जेनरेशन सैटेलाइट डिजाइन है। इसमें डेटा डेंसिटी, कैपेसिटी और पावर जनरेशन को काफी बढ़ाया गया है। यह नया सैटेलाइट 1 Tbps की डाउनलिंक और 160 Gbps की अपलिंक कैपेसिटी सपोर्ट करता है। स्टारलिंक का कहना है कि पुराने V2 सैटेलाइट के मुकाबले इसमें डाउनलिंक क्षमता 10 गुना और अपलिंक क्षमता 22 गुना ज्यादा है।

स्टारशिप से अलग होने के बाद, स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स अपने एंटीना और सोलर पैनल खोलेंगे। इसके बाद वे रेडियो फ्रीक्वेंसी और लेजर लिंक के जरिए जमीन पर मौजूद स्टेशनों और बाकी स्टारलिंक नेटवर्क से संपर्क साधेंगे। फिर ये सैटेलाइट्स अपने ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स की मदद से अपनी कक्षा (ऑर्बिट) को ऊपर उठाएंगे। कंपनी के मुताबिक, लॉन्च के कुछ ही हफ्तों बाद ये सैटेलाइट्स ग्राहकों को सर्विस देना शुरू कर देंगे।

मिशन का लक्ष्य और फ्लाइट प्रोफाइल

स्टारशिप का यह पहला ऑर्बिटल मिशन धरती से करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरेगा। करीब 10 घंटे की इस उड़ान के दौरान यह धरती के लगभग छह चक्कर लगाएगा। इसके बाद इसे चिली के पश्चिम में प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में स्प्लैशडाउन (पानी में लैंडिंग) कराया जाएगा।

सुपर हेवी बूस्टर के लक्ष्य

इस 14वीं उड़ान में बूस्टर का मुख्य काम सफल लॉन्च, ऊपर जाना, स्टेज सेपरेशन, बूस्टबैक बर्न और गल्फ ऑफ अमेरिका में एक ऑफशोर लैंडिंग पॉइंट पर सुरक्षित लैंडिंग करना है। पिछली उड़ान में आई दिक्कतों को देखते हुए इसके हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में कई बदलाव किए गए हैं।

स्टारशिप अपर स्टेज के लक्ष्य

स्टारशिप के अपर स्टेज के मुख्य लक्ष्यों में पहला ऑर्बिटल इंसर्शन, 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स की तैनाती, अंतरिक्ष में सिंगल रैप्टर इंजन का इस्तेमाल करके डीऑर्बिट बर्न और प्रशांत महासागर में कंट्रोल्ड री-एंट्री और स्प्लैशडाउन शामिल हैं। इनमें से तीन सैटेलाइट्स में खास कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे स्टारशिप की हीटशील्ड को स्कैन करेंगे और ऑपरेटरों को तस्वीरें भेजेंगे, ताकि भविष्य के मिशन में स्टारशिप की सुरक्षित वापसी की तैयारी को परखा जा सके।

रॉकेट साइंस का 'होली ग्रेल'

स्पेसएक्स का कहना है कि 407 फीट ऊंचा स्टारशिप अब तक का सबसे बड़ा और ताकतवर रॉकेट है। इसके दोनों हिस्से—सुपर हेवी बूस्टर और शिप अपर-स्टेज—पूरी तरह से और जल्दी दोबारा इस्तेमाल (reusable) किए जा सकने वाले बनाए गए हैं। स्पेसएक्स ने इस बड़ी कामयाबी को रॉकेट साइंस का 'होली ग्रेल' (holy grail of rocketry) कहा है।

स्पेसएक्स को उम्मीद है कि स्टारशिप इंसानों के लिए अंतरिक्ष खोज के नए रास्ते खोलेगा। इससे भविष्य में चांद और मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने का सपना सच हो सकता है। मशहूर फिल्म 'स्टार ट्रेक' के शब्दों में कहें तो, इंसान वहां जा सकेगा जहां आज तक कोई नहीं गया।