Bhojshala Verdict: पूजा भी, नमाज़ भी-सुप्रीम कोर्ट ने कैसे सुलझाया वर्षों पुराना विवाद?
Bhojshala Dispute: क्या एक ही दिन पूजा और नमाज़ से टकराव टल जाएगा? सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला को लेकर बड़ा और संतुलित फैसला सुनाया है। बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूरे दिन पूजा और मुसलमानों को तय समय में जुम्मे की नमाज़ की अनुमति दी गई है।

Supreme Court Bhojshala Verdict: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मंदिर–कमल मौला मस्जिद विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, जिसमें अदालत ने हिंदू और मुस्लिम-दोनों समुदायों को एक ही दिन प्रार्थना करने की अनुमति दी है। खास बात यह है कि इस साल बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है, जिससे स्थिति संवेदनशील हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला को लेकर क्या फैसला सुनाया?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि बसंत पंचमी के दिन हिंदू श्रद्धालु सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा कर सकते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय शुक्रवार की नमाज़ दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक अदा करेगा। अदालत ने दोनों पक्षों के अधिकारों का संतुलन बनाते हुए यह व्यवस्था तय की है।
Delhi: Advocate Vishnu Shankar Jain says, "In the matter of Dhar Bhojshala, the Supreme Court today ordered that traditional Hindu rituals and prayers that have been carried out there over the years can continue. These will be conducted at a designated place, after issuing passes… pic.twitter.com/uOLTowd18K
— IANS (@ians_india) January 22, 2026
नमाज़ के लिए नामों की सूची क्यों मांगी गई?
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने आदेश दिया कि नमाज़ पढ़ने आने वाले लोगों की एक सूची ज़िला प्रशासन को पहले से देनी होगी। इसका मकसद सिर्फ़ एक है-कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचना।
ASI के 2003 के आदेश में क्या कमी थी?
यह मामला तब और पेचीदा हो गया जब याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (HFJ) ने अदालत को बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के आदेश में यह साफ नहीं है कि अगर बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ें तो क्या व्यवस्था होगी। इसी खाली जगह को भरने के लिए सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
भोजशाला मंदिर है या मस्जिद? विवाद क्यों है पुराना?
हिंदू समुदाय भोजशाला को 11वीं सदी का वाग्देवी (मां सरस्वती) मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समाज इसे कमल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। यही वजह है कि यह स्थल लंबे समय से धार्मिक और कानूनी विवाद का केंद्र बना हुआ है।
धार में सुरक्षा इतनी कड़ी क्यों की गई है?
बसंत पंचमी से पहले धार जिले को हाई अलर्ट पर रखा गया है। लगभग 8,000 पुलिसकर्मी, CRPF और RAF के जवान तैनात किए गए हैं। शहर में CCTV निगरानी, पैदल और वाहन गश्त, साथ ही सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी की जा रही है ताकि किसी भी अफवाह या तनाव को समय रहते रोका जा सके। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश फिलहाल शांति और संतुलन बनाए रखने की कोशिश माना जा रहा है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि दोनों समुदाय आपसी सम्मान बनाए रखें और प्रशासन का सहयोग करें।
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