Supreme Court on Unpaid E-Challans: सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ई-चालान की वसूली के लिए रैंडम वाहन जांच और जरूरत पड़ने पर गाड़ी इम्पाउंड करने जैसे उपायों पर जोर दिया। जानिए वाहन मालिकों पर क्या असर होगा।

ई-चालान कटने के बाद उसे नजरअंदाज करना अब महंगा पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को बकाया ट्रैफिक चालान की वसूली के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान रैंडम वाहन जांच और बकाया ई-चालान मिलने पर वाहन को इम्पाउंड करने जैसे उपायों पर चर्चा हुई।

ई-चालान काटना ही काफी नहीं, वसूली जरूरी

यह मामला S. Rajaseekaran बनाम Union of India से जुड़ी सड़क सुरक्षा याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल हजारों-लाखों ई-चालान जारी करने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा, जब तक जुर्माने की वसूली सुनिश्चित न हो। सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब ₹45,000 करोड़ के ई-चालान की वसूली बाकी है, जबकि लगभग ₹25,000 करोड़ की वसूली हो चुकी है।

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सड़क पर पकड़े गए तो क्या जब्त होगी गाड़ी?

सुप्रीम कोर्ट ने रैंडम वाहन जांच का सुझाव दिया। अगर जांच के दौरान किसी वाहन पर बकाया ई-चालान पाया जाता है, तो आवश्यक कार्रवाई के तहत वाहन को इम्पाउंड करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि हर लंबित चालान पर तुरंत सड़क पर गाड़ी जब्त हो जाएगी। कार्रवाई लागू करने का तरीका संबंधित कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार तय होगा।

सिर्फ गाड़ी नहीं, ये सेवाएं भी हो सकती हैं प्रभावित

सुनवाई में बकाया चालान की वसूली के लिए कई दूसरे उपायों पर भी चर्चा हुई। इनमें वाहन के रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल, मालिकाना हक ट्रांसफर, फिटनेस और PUC सर्टिफिकेट जैसी सेवाओं को रोकना शामिल है। वाहनों को Parivahan पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने और ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण या मौजूदा लाइसेंस पर कार्रवाई जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हुई।

बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव भी आया

सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग संभावित तरीके पर भी विचार किया—बकाया ट्रैफिक चालान को बिजली के बकाये से जोड़ना। लेकिन यह सुनवाई के दौरान दिया गया सुझाव था, तत्काल लागू किया गया नया नियम नहीं। इस पूरे मामले का मूल संदेश यही है कि वाहन मालिक लंबित ई-चालान को नजरअंदाज न करें। सुप्रीम कोर्ट अब इस बात पर जोर दे रहा है कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियम सिर्फ कागज पर न रहें, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर भी दिखाई दे।

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