सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की श्रृंगेरी सीट पर वोटों की दोबारा गिनती और उसके नतीजों पर रोक लगा दी है। इस फैसले से कांग्रेस के टी.डी. राजेगौड़ा की विधायकी अस्थायी रूप से बहाल हो गई है। मामले की अगली सुनवाई 21 मई को होगी।

नई दिल्ली: कर्नाटक की श्रृंगेरी विधानसभा सीट पर वोटों की दोबारा गिनती के मामले में एक बहुत बड़ा मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता टी.डी. राजेगौड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए वोटों की दोबारा गिनती की प्रक्रिया और उसके नतीजों पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, जिसका मतलब है कि फिलहाल सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा। मामले की अगली सुनवाई 21 मई को होगी। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को रीकाउंटिंग से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद, रीकाउंटिंग में जीते बीजेपी उम्मीदवार डी.एन. जीवराज की जीत अस्थायी रूप से अमान्य हो गई है। वहीं, कांग्रेस के टी.डी. राजेगौड़ा की विधायकी फिर से बहाल हो गई है।

क्या है श्रृंगेरी रीकाउंटिंग विवाद?

2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टी.डी. राजेगौड़ा ने सिर्फ 201 वोटों से जीत हासिल की थी। इस नतीजे को बीजेपी उम्मीदवार डी.एन. जीवराज ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश पर 2 मई को जब पोस्टल बैलेट दोबारा गिने गए, तो जीवराज 52 वोटों से जीत गए। इसके बाद उन्होंने विधायक पद की शपथ भी ले ली थी।

लेकिन राजेगौड़ा ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आरोप लगाया कि रीकाउंटिंग के दौरान धांधली हुई और वोटों वाले सीलबंद बक्से को खोला गया था। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने टिप्पणी की, "लोकतंत्र को हाईजैक करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।" इसके बाद कोर्ट ने रीकाउंटिंग और उसके नतीजों पर रोक लगा दी।

कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर रीकाउंटिंग से जुड़े सारे रिकॉर्ड मांगे हैं। अगली सुनवाई 21 मई को होगी। इस फैसले से राजेगौड़ा की विधायकी फिलहाल बच गई है और वह विधायक बने रहेंगे।