West Bengal CM  Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी होंगे। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि अगर पिता सालों पहले उनके लिए एक फैसला नहीं लेते तो आज वह मुख्यमंत्री नहीं बन पाते। पिता ने रोका तो उनकी पूरी जिंदगी ही बदल गई।  तो आइए जानते हैं शुभेंदु की दिलचस्प कहानी…

अब दीदी नहीं, दादा बंगाल में 5 साल तक यही नाम गूंजेगा। क्योंकि शुभेंदु अधिकारी के रूप में आज पश्चिम बंगाल को नया मुख्यमंत्री जो मिल गया है। वहीं बीजेपी के इतिहास में यह पहला मौका है जब बंगाल में उनका नेता सीएम बना है। कभी किसी ने क्या खुद शुभेंदु ने भी नहीं सोचा था जिस ममता बनर्जी के साथ आकर राजीनिती शुरू की एक दिन वह उन्हीं के खिलाफ जाकर उनसे 15 साल की सत्ता और सीएम की कुर्सी छीन लेंगे। हालांकि शुभेंदु् अपना बचपना एक सपना पूरा कर लेते तो शायद वह आज इस जगह नहीं होते। जिससे उनके माता-पिता और परिवार भी डरता था, कि बेटा अपनी जिंदगी को लेकर इतना बड़ा फैसला नहीं करे।

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शुभेंदु अधिकारी की अनसुनी कहानी

दरअसल, शुभेंदु् आज भले ही बंगाल के मुख्यमंत्री बन गए हैं, वह प्रदेश के सबसे बड़े और ताकतवर नेता हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि शुभेंदु् कभी राजनेता नहीं बनना चाहते थे। उनका बचपन से ही आध्यात्मिकता की तरफ झुकाव था। वह इसके लिए इतने समर्पित हो चुके थे कि सन्यांस लेने तक का फैसला कर चुके थे। क्योंकि स्कूल लाइफ से ही वह परिवार को बिना बताए हर शनिवार रामकृष्ण मिशन जाते थे। इतना ही नहीं घर में जमा सिक्के भी चुपचाप मिशन में दान कर आते थे। वह बचपन से इतने धार्मिक थे कि घरवालों को डर लगने लगा था कहीं उनका बेटा संन्यासी न बन जाए। माता-पिता को लगने लगा था कि शुभेंदु घर नहीं छोड़ दे।

पिता सालों पहले के फैसले से शुभेंदु आज बने सीएम

बताया जाता है कि पिता ने उनको समझाया और कहा, घर छोड़ना ही धर्म के रास्ते पर चलना नहीं है। राजनीति में आकर भी जनसेवा कर सकते हो। इसलिए उन्होंने राजनीति में जाने का फैसला किया और छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़ गए। वह कॉलेज संघ के अध्यक्ष तक बने, फिर धीरे-धीरे अपने होम टाउन यानि पूर्व मेदिनीपुर में राजनीति में कदम रखा। पार्षद से लेकर सांसद तक का चुनाव लड़ा और सभी जीते। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में 9 चुनाव लड़े और सिर्फ ही हारा है। अब वह मुख्यमंत्री बन गए हैं।