Taliban 5 Years: अफगानिस्तान में तालिबान के राज को 5 साल हो गए हैं. एक तरफ तालिबान अपनी वापसी को सुरक्षा और स्थिरता की जीत बताकर जश्न मना रहा है. वहीं दूसरी तरफ, महिलाओं और पत्रकारों पर लगी पाबंदियों और खराब होती अर्थव्यवस्था ने मानवाधिकार संगठनों की चिंता बढ़ा दी है.
Afghanistan Taliban Rule: अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के दोबारा कब्जे को आज पांच साल पूरे हो गए हैं। 15 अगस्त 2021 को अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बीच तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था। पांच साल बाद तालिबान इसे सुरक्षा, स्वाभिमान और ‘आजादी’ की उपलब्धि के तौर पर पेश कर रहा है, जबकि देश में आर्थिक संकट और मानवाधिकारों को लेकर सवाल अब भी कायम हैं।
काबुल में तालिबान के 5 साल का जश्न
पांचवीं वर्षगांठ के मौके पर काबुल की सड़कों पर तालिबान के झंडे और पोस्टर नजर आए। कई जगहों पर आजादी और राष्ट्रीय गौरव से जुड़े संदेश लिखे गए हैं। तालिबान समर्थक झंडों से सजे वाहनों के साथ सड़कों पर दिखाई दिए।
इस दौरान अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए सैन्य वाहनों का काफिला भी निकाला गया। शहर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। तालिबान प्रशासन ने क्रिकेट मैच समेत कई खेल आयोजनों का भी आयोजन किया है, हालांकि इन आयोजनों में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी पर पाबंदी है।
तालिबान का दावा- सुरक्षा व्यवस्था हुई मजबूत
तालिबान समर्थकों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में अफगानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति बेहतर हुई है। सरकार की ओर से बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट और कारोबार को बढ़ावा देने की कोशिशों का भी दावा किया जाता है।
हालांकि, युवाओं के सामने रोजगार की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। तालिबान प्रशासन का कहना है कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत करने के लिए काम किया जा रहा है और इसके परिणाम आने में समय लगेगा।
आर्थिक विकास के बावजूद लोगों की मुश्किलें बरकरार
विश्व बैंक के अनुमानों के मुताबिक अफगानिस्तान की वास्तविक आर्थिक वृद्धि में सुधार हुआ है, लेकिन प्रति व्यक्ति जीडीपी पर दबाव बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में अफगान शरणार्थियों की वापसी ने भी देश की अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर दबाव बढ़ाया है।
अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अभी व्यापक मान्यता नहीं मिली है। रूस ने तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता दी है, जबकि दूसरे देशों के साथ तालिबान लगातार कूटनीतिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान से रिश्तों में भी बढ़ा तनाव
तालिबान शासन के पांच वर्षों में पड़ोसी पाकिस्तान के साथ रिश्ते भी खराब हुए हैं। दोनों देशों के बीच तनाव और सैन्य टकराव ने सीमा क्षेत्रों में मानवीय स्थिति को और मुश्किल बनाया है।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी और बढ़ती गरीबी के कारण अफगानिस्तान की आम आबादी के सामने भोजन, रोजगार और बुनियादी जरूरतों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
महिलाओं और लड़कियों पर सबसे ज्यादा पाबंदियां
तालिबान शासन की सबसे ज्यादा आलोचना महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर होती रही है। महिलाओं के सार्वजनिक जीवन, रोजगार और शिक्षा पर कई तरह की पाबंदियां लागू हैं। किशोरियों की शिक्षा पर रोक ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ाई है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इन प्रतिबंधों ने महिलाओं की स्वतंत्रता और रोजमर्रा की जिंदगी को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर कार्रवाई को लेकर भी तालिबान की आलोचना होती रही है।
‘ये पांच साल बहुत मुश्किल रहे’
अफगानिस्तान की कई महिलाओं के लिए तालिबान शासन के ये पांच साल बेहद कठिन रहे हैं। एक युवती ने अपनी पहचान छिपाते हुए कहा कि लगातार बढ़ती पाबंदियों के बीच उसे ऐसा महसूस होता है जैसे वह ‘500 साल पुरानी औरत’ बन गई हो।
तालिबान जहां इन पांच वर्षों को अपनी सत्ता, सुरक्षा और स्वतंत्रता की उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है, वहीं मानवाधिकार संगठनों और आम नागरिकों के लिए यह दौर अधिकारों, रोजगार और भविष्य को लेकर गंभीर सवालों से भरा हुआ है।
