VCK Deputy CM Demand: तमिलनाडु में सरकार गठन से पहले विजय की TVK पार्टी मुश्किल में फंसती दिख रही है। VCK ने समर्थन के बदले डिप्टी CM पद और बड़े मंत्रालयों की मांग रख दी है। कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को हैदराबाद भेजकर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
तमिलनाडु की राजनीति इस वक्त बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) सत्ता के बेहद करीब पहुंच चुकी है, लेकिन सरकार गठन से पहले सहयोगी दलों की शर्तों ने राजनीतिक समीकरणों को और पेचीदा बना दिया है। खासतौर पर विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) ने समर्थन के बदले ऐसी मांगें रख दी हैं, जिनसे राज्य की सियासत में नया सस्पेंस पैदा हो गया है।

सूत्रों के मुताबिक, VCK ने सरकार में हिस्सेदारी के तहत उपमुख्यमंत्री पद और कई अहम मंत्रालयों की मांग की है। माना जा रहा है कि इन शर्तों पर सहमति बनने के बाद ही पार्टी विजय की TVK सरकार को समर्थन देने पर अंतिम फैसला करेगी।
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डिप्टी CM पद पर अड़ी VCK
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि VCK चाहती है कि पार्टी प्रमुख थोल थिरुमावलवन को तमिलनाडु का उपमुख्यमंत्री बनाया जाए। इसके अलावा पार्टी अपने नवनिर्वाचित विधायकों के लिए भी कैबिनेट में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां चाहती है। शुक्रवार शाम डिजिटल माध्यम से हुई पार्टी की अहम बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में यह भी तय किया गया कि समर्थन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख थिरुमावलवन ही लेंगे।
विजय की सीट पर भी नजर
सरकार गठन की चर्चाओं के बीच सीटों को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, यदि विजय तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा सीट छोड़ते हैं तो VCK चाहती है कि वहां से थोल थिरुमावलवन चुनाव लड़ें। बताया जा रहा है कि विजय चेन्नई की पेरम्बूर सीट अपने पास रख सकते हैं। ऐसे में सहयोगी दलों के बीच सीटों का संतुलन भी सरकार गठन की बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
आज शाम हो सकता है बड़ा फैसला
VCK प्रवक्ता के.के. पावलन ने संकेत दिए हैं कि पार्टी प्रमुख आज शाम 4 बजे TVK को समर्थन देने या न देने पर अंतिम घोषणा कर सकते हैं। शुक्रवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में उन्हें इस संबंध में पूर्ण अधिकार दे दिए गए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला तमिलनाडु की नई सरकार की दिशा तय कर सकता है।
दलित आरक्षण और आयोगों का मुद्दा भी अहम
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सिर्फ सत्ता साझेदारी ही नहीं बल्कि सामाजिक और संवैधानिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। VCK ने पिछली सरकार द्वारा गठित जातीय हत्याओं की जांच आयोगों को जारी रखने और सरकारी नौकरियों में दलितों को पदोन्नति में आरक्षण सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे भी उठाए हैं। पार्टी इन मुद्दों को समर्थन की शर्तों में शामिल करना चाहती है, ताकि सामाजिक न्याय के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाया जा सके।
कांग्रेस ने विधायकों को भेजा हैदराबाद
तमिलनाडु में जारी राजनीतिक अनिश्चितता के बीच कांग्रेस भी सतर्क नजर आ रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संभावित राजनीतिक जोड़-तोड़ से बचाने के लिए कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों को हैदराबाद भेज दिया है। इस कदम को सरकार गठन से पहले बढ़ती राजनीतिक हलचल और रणनीतिक सतर्कता के तौर पर देखा जा रहा है।
बहुमत से सिर्फ 10 सीट दूर है TVK
23 अप्रैल को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की TVK ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए पार्टी को अभी 10 सीटों की जरूरत है। इसी वजह से TVK लगातार कांग्रेस, CPI, CPM और VCK जैसी पार्टियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। लेकिन सहयोगी दलों की बढ़ती मांगों ने विजय के सामने सत्ता का रास्ता आसान नहीं रहने दिया है। तमिलनाडु की राजनीति में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय सहयोगी दलों की शर्तें मानकर सरकार बनाएंगे या फिर राज्य में राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बदलते नजर आएंगे।
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