बांग्लादेश के नए PM तारिक रहमान का 'इंजीनियर' कहकर मज़ाक उड़ रहा है। यह उनकी BNP पार्टी की 209 सीटों की जीत के बाद चुनावी हेरफेर के आरोपों पर एक व्यंग्य है। रहमान इन आरोपों को खारिज करते हैं।

बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान का सोशल मीडिया पर जमकर मज़ाक उड़ रहा है। 12 फरवरी को हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को मिली भारी जीत के बाद लोग और राजनीतिक विरोधी उन्हें ताना मारते हुए 'इंजीनियर' बुला रहे हैं। यह शब्द मीम्स और AI से बनी तस्वीरों के जरिए वायरल हो गया है। हालांकि, इसका रहमान की पढ़ाई-लिखाई से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह चुनावी हेरफेर के गंभीर आरोपों से जुड़ा एक तंज है।

तारिक रहमान की सबसे बड़ी डिग्री हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट (HSC) है। वह 17 साल के स्व-निर्वासन के बाद हाल ही में बांग्लादेश लौटे थे। चुनाव में BNP को 297 में से 209 सीटें मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके इतने लंबे समय तक बाहर रहने और फिर अचानक सत्ता में आने को लेकर कुछ लोग उनका समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ आलोचना। नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के उनके विरोधी आरोप लगा रहे हैं कि रहमान ने पार्टी के पक्ष में चुनाव नतीजों की 'इंजीनियरिंग' की है। इन्हीं आरोपों के चलते सोशल मीडिया पर राजनीतिक व्यंग्य शुरू हो गया। यूजर्स कंस्ट्रक्शन हेलमेट पहने रहमान की एडिट की हुई तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं और 'नेशनल इलेक्शन इंजीनियरिंग' में 'सफलता' के लिए मज़ाकिया अंदाज़ में बधाई दे रहे हैं।

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सोशल मीडिया पर चल रही यह मज़ाकिया मुहिम उस गंभीर राजनीतिक बहस से बिल्कुल अलग है जो देश में चल रही है। NCP और जमात के नेताओं ने बड़े पैमाने पर धांधली और नतीजों में हेरफेर का आरोप लगाया है, ताकि विपक्षी उम्मीदवारों को हराया जा सके। हालांकि, तारिक रहमान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। चुनाव के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने 'इंजीनियरिंग' के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि उनकी एकमात्र रणनीति मतदाताओं का दिल जीतना थी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनकी पार्टी हेरफेर पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक समर्थन पर विश्वास करती है।

भले ही 'इंजीनियर' शब्द का इस्तेमाल ऑनलाइन व्यंग्य के लिए हो रहा है, लेकिन यह बहस बांग्लादेश में चुनाव के बाद के माहौल में गहरे राजनीतिक ध्रुवीकरण को दर्शाती है। विपक्ष इस मज़ाक को चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की ओर ध्यान खींचने के एक हथियार के रूप में देखता है, जबकि समर्थक और पर्यवेक्षक इसे सिर्फ एक राजनीतिक ड्रामा मान रहे हैं—एक ऐसा ड्रामा जो देश की बदलती राजनीति में प्रतिद्वंद्विता की गहराई को दिखाता है।