टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में 5% Salary Hike की घोषणा के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कई कर्मचारियों का दावा है कि अप्रेजल लेटर मिलने के बाद उनकी टेक-होम सैलरी 3,000 रुपये तक घट गई। CTC Structure बदलाव, Variable Pay कटौती, Gratuity Removal और नए Labor Code को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या IT सेक्टर में शुरू हो चुका है ‘Hidden Salary Cut’ का नया दौर?
TCS Salary Hike: भारत की सबसे बड़ी IT कंपनियों में से एक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services) यानी TCS इस समय अपने कर्मचारियों के बीच बढ़ते असंतोष को लेकर चर्चा में है। कंपनी ने हाल ही में औसतन 5 प्रतिशत वेतन वृद्धि (Appraisal Hike) की घोषणा की थी, लेकिन कई कर्मचारियों का दावा है कि अप्रेजल लागू होने के बाद उनके हाथ में आने वाले वेतन में बढ़ोतरी की बजाय कटौती हो गई। कुछ कर्मचारियों ने तो यह तक कहा कि उनकी मासिक सैलरी करीब 3,000 रुपये तक कम हो गई है। कंपनी द्वारा औसतन 5 प्रतिशत वेतन वृद्धि की घोषणा के बावजूद, कई कर्मचारियों का दावा है कि उनका इन-हैंड (Take-home) वेतन बढ़ने के बजाय कम हो गया है।

अप्रेजल मिला या सैलरी कट गई? कर्मचारियों में बढ़ा भ्रम
TCS कर्मचारियों के अनुसार, 18 मई से लागू किए गए नए वेतन संशोधन के बाद स्थिति उम्मीद के विपरीत दिखाई दी। कर्मचारियों को लगा था कि 5 प्रतिशत की औसत बढ़ोतरी से उनकी मासिक आय में सुधार होगा, लेकिन कई लोगों ने पाया कि उनके संशोधित वेतन ढांचे में वास्तविक लाभ बेहद कम है। कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनके वार्षिक पैकेज में 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक की गिरावट दिख रही है। इस स्थिति ने खासकर उन कर्मचारियों को अधिक प्रभावित किया है, जिन्हें प्रदर्शन मूल्यांकन में B और C श्रेणी में रखा गया। उनका कहना है कि अप्रेजल के बाद भी उनकी आर्थिक स्थिति पहले जैसी ही रही या और खराब हो गई।
असली खेल CTC का? ग्रेच्युटी हटने से बढ़ा कन्फ्यूजन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह कंपनी की बदली हुई CTC संरचना है। बताया जा रहा है कि TCS ने इस बार कर्मचारियों के “कॉस्ट टू कंपनी” (CTC) से ग्रेच्युटी वाले हिस्से को अलग कर दिया है। हालांकि कंपनी का कहना है कि ग्रेच्युटी का लाभ बंद नहीं किया गया है, बल्कि उसे आंतरिक संरचना में रखा गया है। यही बदलाव कर्मचारियों के लिए भ्रम का कारण बन गया। पहले जहां ग्रेच्युटी कुल CTC में शामिल होती थी, अब नई संरचना में वह दिखाई नहीं दे रही। ऐसे में कई कर्मचारियों को लग रहा है कि उनकी कुल सैलरी घटा दी गई है।
वेरिएबल पे पर भी उठा विवाद, ‘वर्क फ्रॉम ऑफिस’ से जोड़ा गया बोनस?
कर्मचारियों ने केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि “वेरिएबल पे” में भी कटौती का आरोप लगाया है। कुछ कर्मचारियों का दावा है कि पहले हर महीने मिलने वाला वेरिएबल पे अब त्रैमासिक या वार्षिक भुगतान में बदला जा रहा है। इससे मासिक टेक-होम सैलरी पर सीधा असर पड़ रहा है। इतना ही नहीं, कुछ कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अब बोनस और परफॉर्मेंस पे को “वर्क-फ्रॉम-ऑफिस” नियमों के पालन से जोड़ा जा रहा है। यानी ऑफिस उपस्थिति कम होने पर कर्मचारियों के इंसेंटिव प्रभावित हो सकते हैं।
A+ कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, बाकी कर्मचारियों में नाराज़गी
जहां कम प्रदर्शन वाले कर्मचारी असंतुष्ट दिख रहे हैं, वहीं उच्च प्रदर्शन रेटिंग वाले कर्मचारियों को इस अप्रेजल चक्र से अच्छा फायदा मिला है। A+ रेटिंग वाले कई कर्मचारियों ने डबल डिजिट हाइक मिलने की बात कही है। वहीं A श्रेणी के कर्मचारियों को भी अपेक्षाकृत बेहतर बढ़ोतरी मिली। लेकिन B और C श्रेणी के कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सैलरी में हुई वृद्धि महंगाई और टैक्स कटौती के मुकाबले बेहद कम है।
IT सेक्टर पर दबाव के बीच आया विवाद
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब भारतीय IT इंडस्ट्री वैश्विक आर्थिक दबाव, क्लाइंट खर्च में कमी और प्रोजेक्ट देरी जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। Infosys, HCLTech और Tech Mahindra जैसी कंपनियां भी वेतन वृद्धि को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। TCS ने सफाई देते हुए कहा है कि नया वेतन ढांचा “नए लेबर कोड” के अनुरूप तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी को सुरक्षित रखना तथा टैक्स बचत को आसान बनाना है। कंपनी ने यह भी दोहराया कि वह हर साल वेतन वृद्धि देने की अपनी परंपरा जारी रखेगी। लेकिन फिलहाल, 5.84 लाख से अधिक कर्मचारियों वाली इस IT दिग्गज कंपनी में एक बड़ा सवाल गूंज रहा है-“अगर अप्रेजल हुआ है, तो सैलरी कम क्यों हुई?”


