TCS Q3 Results 2026: मुनाफा घटा, लेकिन रेवेन्यू-डिविडेंड ने संभाला निवेशकों का भरोसा
TCS Q3 Results: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने 12 जनवरी को वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए। इस तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट तिमाही आधार (QoQ) पर घटा है।

TCS का नेट प्रॉफिट उम्मीद से कम
तीसरी तिमाही में TCS का नेट प्रॉफिट ₹10,657 करोड़ रहा, जबकि पिछली तिमाही में यह ₹12,075 करोड़ था। बाजार विश्लेषकों को ₹12,771 करोड़ के मुनाफे की उम्मीद थी। यानी कंपनी का प्रॉफिट अनुमान से कम रहा है।
TCS की कुल इनकम बाजार अनुमान से ज्यादा
हालांकि, मुनाफे में गिरावट के बावजूद कंपनी का रेवेन्यू और ऑपरेशनल परफॉर्मेंस बेहतर रहा। Q3 में TCS की कुल आय ₹67,087 करोड़ रही, जो बाजार अनुमान ₹66,728 करोड़ से अधिक है।
TCS Dividend: शेयरधारकों के लिए बड़ा एलान
शेयरधारकों को खुश करने के लिए TCS के बोर्ड ने ₹46 प्रति शेयर स्पेशल डिविडेंड और ₹11 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड देने का एलान किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आकर्षक डिविडेंड और मजबूत ऑपरेशनल नतीजों से निवेशकों का भरोसा बना रहेगा।
ऑपरेशनल लेवल पर कंपनी मजबूत स्थिति में
कंपनी का EBIT (Earnings Before Interest and Tax) Q3 में ₹16,889 करोड़ रहा। विश्लेषकों का अनुमान ₹16,800 करोड़ था, जिससे यह साफ है कि ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
दिसंबर तिमाही में मुनाफे पर असर डालने वाले 3 बड़े कारण
- रीस्ट्रक्चरिंग एक्सपेंसेज: कंपनी ने जुलाई 2025 में वर्कफोर्स रीस्ट्रक्चरिंग का ऐलान किया था। जिन कर्मचारियों की जरूरत नहीं रही, उनके लिए टर्मिनेशन बेनिफिट्स देने पड़े।
- नए लेबर कोड्स का असर: देश में लागू होने वाले नए लेबर कोड्स से TCS की लागत बढ़ी है। कंपनी के मुताबिक, ग्रैच्युटी से जुड़ा अतिरिक्त असर ₹1816 करोड़। वहीं, वेज की परिभाषा बदलने से असर: ₹312 करोड़। इस तरह नए लेबर कोड्स से TCS पर कुल ₹2,182 करोड़ का लॉन्ग-टर्म असर पड़ेगा।
- अमेरिका में कानूनी विवाद: कंपनी को अमेरिका में लंबे समय से चल रहे एक कानूनी मामले के लिए प्रोविजनिंग करनी पड़ी।
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