दो गांव, एक पैटर्न: पहले 300, अब मार दिए गए 100 कुत्ते? जांच में चौंकाने वाले संकेत
तेलंगाना के याचराम गांव में ग्राम पंचायत पर 100 आवारा कुत्तों की कथित हत्या का मामला दर्ज हुआ है। स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन की शिकायत पर सरपंच सहित कई अधिकारियों पर पशु क्रूरता अधिनियम और BNS के तहत जांच जारी है।

Telangana Stray Dogs Killing Case: तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ पशु प्रेमियों को बल्कि आम लोगों को भी हैरान कर दिया है। याचराम गांव की ग्राम पंचायत पर आरोप है कि गांव में रहने वाले लगभग 100 आवारा कुत्तों को कथित तौर पर मार दिया गया। इस मामले में पुलिस ने गांव के सरपंच, वार्ड सदस्यों और पंचायत सचिव के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन के सदस्यों की शिकायत के बाद की गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि यह सब कुछ पंचायत की जानकारी और सहमति से हुआ। फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और पूरे मामले की परत-दर-परत जांच की जा रही है।
आखिर गांव पंचायत पर ऐसे गंभीर आरोप क्यों लगे?
शिकायत के अनुसार, याचराम गांव में अचानक बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते गायब होने लगे। जब पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसकी जानकारी जुटानी शुरू की, तो उन्हें शक हुआ कि कुत्तों को जानबूझकर मारा गया है। इसके बाद स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ने पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में आरोप गंभीर लग रहे हैं, लेकिन सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
क्या यह पहला मामला है या पहले भी हो चुका है ऐसा?
इस महीने की शुरुआत में तेलंगाना के ही श्याम्पेट और अरेपल्ली गांवों में ऐसा ही एक मामला सामने आया था। वहां करीब 300 आवारा कुत्तों को मारने का आरोप लगा था। इस मामले में भी श्याम्पेट के सरपंच समेत कुल 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। पुलिस के मुताबिक, आरोप है कि कुत्तों को मारने के लिए जहरीले इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया था। यह मामला पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और BNS की धारा 325 के तहत दर्ज किया गया।
पुलिस जांच में क्या सामने आया है?
श्याम्पेट मामले की जांच के दौरान सर्कल इंस्पेक्टर पी. रंजीत राव ने बताया कि शुरुआती जांच में अनुमान लगाया गया कि कुल कुत्तों में से लगभग 1/10 कुत्तों की मौत हुई है। मृत कुत्तों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए RFSL (क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) भेजा गया है। हालांकि, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई ग्रामीणों ने कुत्तों के काटने और त्वचा से जुड़ी बीमारियों की शिकायत की थी, जिसके बाद कथित तौर पर यह कदम उठाया गया।
बीमारी का डर या कानून की अनदेखी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कुत्तों से परेशानी थी, तो क्या कानून के तहत उनका समाधान नहीं निकाला जा सकता था? क्या पंचायत को ऐसा कदम उठाने का अधिकार था? और क्या यह मामला सिर्फ याचराम तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा पैटर्न छुपा है? फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
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