KDMC Hospital Attack: ठाणे के KDMC अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले के बाद पीड़ित डॉक्टरों के परिवार ने उनकी मानसिक स्थिति को लेकर बड़ा खुलासा किया है। परिवार ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा की मांग की है।

महाराष्ट्र के ठाणे में डॉक्टरों पर हुए हमले का मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य का भी मुद्दा बन गया है। केडीएमसी (KDMC) के शास्त्री नगर अस्पताल में शिवसेना के एक नगरसेवक द्वारा दो डॉक्टरों पर कथित हमले के बाद पीड़ित डॉक्टरों के परिवार ने पहली बार उनकी मानसिक स्थिति को लेकर खुलकर बात की है। उनका कहना है कि घटना के बाद दोनों डॉक्टर गहरे सदमे में हैं और अब भी डर के माहौल में जी रहे हैं।

‘नींद से उठकर पूछते हैं, क्या कोई हमला कर रहा है?’

डॉ. सृष्टि बाविस्कर के पिता महेंद्र बाविस्कर ने बताया कि उनकी बेटी और उनके सहयोगी डॉ. वैभव सालुंखे अब भी घटना के सदमे से उबर नहीं पाए हैं। उनके अनुसार, दोनों कई बार रात में अचानक घबराकर उठ जाते हैं और पूछते हैं कि "क्या कोई हमला कर रहा है?"

उन्होंने मीडिया में आई उन खबरों का भी खंडन किया, जिनमें दोनों डॉक्टरों के इस्तीफा देने की बात कही गई थी। परिवार का कहना है कि दोनों डॉक्टरों ने नौकरी नहीं छोड़ी है।

डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर उठी बड़ी मांग

डॉ. सृष्टि के माता-पिता ने राज्य सरकार से अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि डॉक्टर 48 से 72 घंटे तक लगातार काम करते हैं, कई बार बिना पर्याप्त नींद और भोजन के। ऐसे में यदि उन पर शारीरिक हमला होता है, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चिंता का विषय है।

डॉ. सृष्टि की मां संगीता बाविस्कर ने कहा कि यदि किसी डॉक्टर से गलती होती है तो उसके लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की।

आरोपी नगरसेवक गिरफ्तार, 13 जुलाई तक न्यायिक हिरासत

यह घटना सोमवार को केडीएमसी के शास्त्री नगर अस्पताल में हुई थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे को डॉ. वैभव सालुंखे के साथ मारपीट करते देखा गया। बीच-बचाव करने पहुंचीं डॉ. सृष्टि बाविस्कर के साथ भी कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया और उनका मोबाइल फोन फेंक दिया गया।

पुलिस ने बुधवार रात रमेश म्हात्रे और उनके तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में तबीयत बिगड़ने की शिकायत पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां स्वास्थ्यकर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया और उन्हें नगरसेवक पद से अयोग्य घोषित करने की मांग की। मेडिकल जांच के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अदालत ने 13 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।