बांग्लादेश में कट्टरपंथ और विदेशी प्रभाव से भारत-विरोधी भावना बढ़ रही है, जिससे रिश्ते खराब हुए हैं। वहाँ हिंदुओं की आबादी 22% से घटकर 8% से कम हो गई है। चीन-अमेरिका के असर से अन्य पड़ोसी देश भी भारत से दूर हो रहे हैं।
बांग्लादेश एक ऐसा देश था जिसका पाकिस्तान बहुत ज़्यादा शोषण कर रहा था। जब पाकिस्तान और मुस्लिम कट्टरपंथियों ने अपनी शरिया संस्कृति थोपने की कोशिश की, तो बांग्लादेश के लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। तब बांग्लादेशियों को बहुत सताया गया था। ऐसे मुश्किल हालात में भारत ने ही बांग्लादेश को पाकिस्तान से आज़ाद कराया था। लेकिन, अब हालात बिल्कुल उल्टे हो गए हैं। बांग्लादेश में भारत और भारतीय संस्कृति के खिलाफ नफरत की लहर उठ रही है। अमेरिका समेत कई दूसरे देशों से भी भारत को नकारात्मक संदेश मिल रहे हैं। भारत के पड़ोसी दोस्त देश, दुश्मन देश बनते जा रहे हैं। इन सब की वजहें क्या हैं? बांग्लादेश की हिंदू नफरत का हल क्या है? विदेशों के साथ भारत के रिश्तों का भविष्य क्या है? ऐसे ही कई अहम मुद्दों पर समीक्षक, इतिहासकार और दार्शनिक डॉ. जी.बी. हरीश ने 'कन्नड़प्रभ' से आमने-सामने बात की है।
सवालः एक इतिहासकार के तौर पर, आपके हिसाब से बांग्लादेश और भारत के रिश्ते पहले कैसे थे?
जवाबः भारत ने ही उसे पाकिस्तान के शोषण से आज़ादी दिलाई थी। इसलिए भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बहुत अच्छे थे। इससे पहले, बंगाली और भारतीय संस्कृति का पालन करना चाहिए, बंगाली पहचान बनी रहनी चाहिए, ऐसी सोच बांग्लादेश के लोगों में थी। इसीलिए उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के लिखे गीत को अपने राष्ट्रगान के रूप में अपनाया। उस देश में बहने वाली गंगा नदी को पद्मा नदी कहा जाता है। बांग्लादेश भारत को अपने मार्गदर्शक की तरह मानता था।
सवालः तो फिर, मुस्लिम कट्टरपंथ और हिंदू नफरत कैसे पैदा हुई? इसकी वजह क्या है?
जवाबः यह कट्टरपंथ की वजह से आया बदलाव है। आज़ादी मिलने के कुछ ही सालों में बांग्लादेश के संस्थापक अध्यक्ष, बंगबंधु मुजीब उर रहमान की हत्या कर दी गई। ऐसे ही कट्टरपंथियों ने शेख हसीना को देश से भागने पर मजबूर कर दिया था। इसकी वजह वहां के कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन हैं। कट्टरपंथियों की सोच है कि बांग्लादेश एक कट्टर मुस्लिम देश बनना चाहिए और वहां शरिया कानून लागू होना चाहिए। उस समय के मुजीब उर रहमान ने या हाल के दिनों में शेख हसीना ने इसकी इजाज़त नहीं दी। उन दोनों मौकों पर देश का शासन सेना के हाथ में चला गया। सेना का शासन आने का मतलब है कि वहां ताकतवर देशों का दखल है।
सवालः भारत ने ही बांग्लादेश को आज़ादी दिलाई, ऐतिहासिक रिश्ते भी हैं। इसके बावजूद भारत हिंदुओं की सुरक्षा की चुनौतियों को क्यों नहीं संभाल पा रहा है?
जवाबः पिछले एक साल से बांग्लादेश में भारत विरोधी सोच और मज़बूत हो रही है। पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश भी सेना के नियंत्रण और कट्टरपंथियों के हाथ में जा रहा है। यह पाकिस्तान की तरह एक कट्टरपंथी देश में बदल रहा है। यह भारतीयों और हिंदुओं के लिए अच्छा नहीं है। इसलिए, दुनिया के 30 से ज़्यादा मुस्लिम देशों और पड़ोसी थाईलैंड, इंडोनेशिया जैसे देशों के ज़रिए बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कोशिशें होनी चाहिए। लगता है कि केंद्र सरकार इस मामले को बहुत सावधानी से संभाल रही है।
सवालः फिलहाल बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत कैसी है?
जवाबः फिलहाल हिंदुओं की हालत चिंताजनक है। आर्थिक रूप से संपन्न हिंदुओं की संख्या बहुत कम हो गई है या कह सकते हैं कि है ही नहीं। शहरी इलाकों में तो हिंदुओं की संख्या घट रही है। खेती करने वाले लोग जल्दी अपना गांव नहीं छोड़ सकते, इसलिए वे ग्रामीण इलाकों में रुके हुए हैं। 1940 में जो हिंदुओं की आबादी 22% थी, वह आज 8% से भी कम हो गई है। भविष्य में यह संख्या और भी कम हो जाए तो कोई हैरानी नहीं होगी।
सवालः हिंदुओं की संख्या कम होने की क्या वजहें हैं?
जवाबः जब पूछा जाता है कि हिंदुओं की आबादी कैसे कम हुई, तो वहां की सरकारें कहती हैं कि वे 'लापता' हो गए! क्या यह यकीन करने लायक है कि करोड़ों लोग लापता हो गए?
सवालःतो फिर, बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
जवाबः फिलहाल कई कोशिशें कर रही है। साथ ही, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में ज़ुल्म के शिकार हुए धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए लाए गए नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को ठीक से लागू करना चाहिए। भारत में शरण मांगने वाले हिंदुओं को नागरिकता देनी चाहिए। उसी तरह, भारत में अवैध रूप से घुसकर बसे बांग्लादेशी नागरिकों को देश से बाहर निकाल देना चाहिए।
सवालः बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते बिगड़ने की क्या वजहें हैं?
जवाबः किसी भी दो देशों के बीच रिश्ते हमेशा एक जैसे नहीं रहते। कभी वे शांत समंदर की तरह होते हैं तो कभी आग और तूफान की तरह। बांग्लादेश में अमेरिका और चीन अपना असर डाल रहे हैं। वे राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। बांग्लादेश में अब सेना का दबदबा है। अगर सेना का दबदबा है, तो इसका मतलब है कि उस देश में अमेरिका और चीन जैसे ताकतवर देशों का हाथ है।
सवालः सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मॉरीशस जैसे दोस्त देश भी अब भारत के खिलाफ हो रहे हैं, क्यों?
जवाबः जिम में मसल्स बनाते समय शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दर्द होता है। लेकिन, बनाने के बाद शरीर मज़बूत दिखता है। वैसे ही, भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन गया है। देश की उम्मीदें और भी बड़ी हैं। जो हमसे ऊपर हैं, उन्हें स्वाभाविक रूप से चिंता और असुरक्षा महसूस होती है। उनका तर्क है कि कोई भी उनके करीब नहीं आना चाहिए। इसलिए, हमारे पड़ोसी देशों के राजनेताओं, सेना और कट्टरपंथियों का इस्तेमाल करके उन्हें भड़काने का काम चल रहा है। सरकार इसे सावधानी से संभाल रही है।
सवालः पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता जैसी घटनाओं का भारत पर क्या असर होता है?
जवाबः किसी भी देश के लिए पड़ोसी देशों में अराजकता अच्छी नहीं होती। बांग्लादेश सरकार को वहां के कट्टरपंथियों ने हिंसक तरीके से उखाड़ फेंका। कुछ लोग चाहते थे कि भारत सरकार को भी उसी तरह उखाड़ फेंका जाए और भारतीय युवा भी संघर्ष के लिए आगे आएं। इसके ज़रिए देश में दंगे और अशांति पैदा करना, अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना और भाईचारे को खत्म करना चाहते थे, ऐसी बातें कुछ लोगों ने की थीं। लेकिन, भारतीयों ने ऐसी किसी भी भड़काऊ बात पर ध्यान नहीं दिया। भारत स्थिर है।
सवालः भारत के सभी पड़ोसी देश चीन के साथ अच्छे रिश्ते बना रहे हैं। भारत की प्राथमिकता कहां चूक गई?
जवाबः चीन आज दुनिया का दूसरा सबसे ताकतवर देश बन चुका है। यह एशिया की सबसे बड़ी ताकत है। इसका विकल्प सिर्फ भारत है। हमारा देश भी अच्छी तरक्की कर रहा है। पाकिस्तान को छोड़कर सभी पड़ोसी देशों से हमारे अच्छे रिश्ते हैं। कभी-कभी हमसे ज़्यादा ताकतवर एक-दो देशों के लालच में वहां के राजनेता आ जाते हैं। लेकिन, उसके बाद वे फिर हमारी तरफ लौट आते हैं। उदाहरण के लिए, आप मॉरीशस, श्रीलंका और नेपाल को ही देख सकते हैं।
सवालः अमेरिका भी हमें टैरिफ की धमकी दे रहा है। वहां के भारतीयों के खिलाफ भी गुस्सा दिखा रहा है। इसका क्या असर होगा?
जवाबः 'अमेरिका फर्स्ट' के नारे के साथ सत्ता में आए राष्ट्रपति ट्रंप को अपने देश के लोगों के सामने इसे साबित करना है। इसलिए वे कभी दोस्त की तरह तो कभी दुश्मन की तरह बर्ताव करते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका में और अमेरिका के साथ हमारे देश के भी बहुत सारे हित जुड़े हुए हैं। हमेशा की तरह इस मामले में भी हमें सब्र से काम लेना चाहिए।
सवालः अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति का ही अपहरण कर लिया। वह सभी देशों के शासन में सीधे दखल दे रहा है। इस बर्ताव की क्या वजहें हैं?
जवाबः अमेरिका का यह बर्ताव सैकड़ों सालों से ऐसा ही है। उस देश की नज़र हमेशा तेल और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों पर रहती है। किसी भी तरीके से उसे हासिल करना या छीन लेना ही अमेरिका का एजेंडा है।
सवालः अमेरिका के साथ हमारे रिश्ते कैसे रहेंगे?
जवाबः जब हमारे देश ने दो बार परमाणु बम का परीक्षण किया, तो उसने अमेरिका को पता चले बिना सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इसका मतलब यह नहीं कि हम युद्ध करने जाएंगे। हमारे देश की नीति है कि युद्ध आखिरी रास्ता है। अमेरिका के साथ हमारे देश के रिश्ते अच्छे हैं। दुनिया की सबसे ज़्यादा आबादी वाला और विकासशील देश होने के कारण, अगर हम थोड़ा सब्र रखें तो ज़्यादा फायदा होगा।
