TMC Congress Merger : TMC के भविष्य पर मंडराया बड़ा संकट! अब क्या करेंगी ममता बनर्जी? बुआ-भतीजे की सियासत में बड़ा खेल? क्या कांग्रेस में विलय होगी TMC? क्या खत्म होने वाली है TMC की कहानी? या फिर आने वाला है बड़ा ट्विस्ट? बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर! क्या बदलने वाला है ममता का सियासी ठिकाना?

Mamata Banerjee News : तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। एक के बाद एक इस्तीफों और बागी नेताओं के दावों ने पार्टी के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतना ही नहीं इन बागियों की वजह से पश्चिम बंगाल की तीन तीन बार मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी के फ्यूचर पॉलिटिक्स को भी खतरे में डाल दिया है। इसी बीच अटकलें लगाई जा रही हैं कि ममता दीदी घर वापसी कर सकती हैं। यानि उनकी पार्टी टीएमसी का कांग्रेस में विलय होने की संभवानाएं बढ़ती नजर आ रही हैं।

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क्यों कांग्रेस नेताओं से मिल रहीं ममता और अभिषेक

बता दें कि बुआ-भतीजे के सियासी संकट के बीच TMC नेता और सासंद अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को नई दिल्ली में 10 जनपथ पर लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी से मुलाकात की। INDIA ब्लॉक के भीतर तालमेल और TMC में बढ़ते अंदरूनी तनाव के बीच इस बैठक ने सबका ध्यान खींचा है। जिससे मीडिया में खबरें चल रही हैं कि जल्द ही टीएमसी का कांग्रेस में विलय होने वाला है। इसी उद्देशय से अभिषेक ने राहुल से मुलाकात की है। वहीं ममता बनर्जी ने भी दो दिन पहले इसी टॉपिक पर सोनिया गांधी से मिलकर बात की है।

टीएमसी की विलय होने के लिए दो शर्तें

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस में टीएमसी के विलय होने के पीछे ममता गुट की दो शर्ते रखी हैं। पहली की ममता बनर्जी को राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद मिले। वहीं दूसरी शर्त है कि सांसद अभिषेक बनर्जी को कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलना चाहिए। हलांकि इन दावों के पीछे किसी नेता का ना तो कोई बयान सामने आया है और ना ही किसी ने इसको लेकर कोई पुष्टि की है।

क्या ममता बनर्जी की कांग्रेस जाने की मजबूरी

  • पहला कारण है कि टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 विधायक बागी होकर रितब्रत बनर्जी गुट के साथ आए। इन्होंने रितब्रत को अपना विपक्ष का नेता चुन लिया।
  • दूसरा कारण है काकोली घोष की अगुआई में लोकसभा सांसदों की बगावत, करीब 20 सासंदों ने टीएमसी से निकलकर एनडीए के समर्थन में खड़े हो गए।
  • तीसरा कारण यह है कि विधानसभा और लोकसभा में पार्टी के टूटने के बाद अब ममता बनर्जी के सामने अपना वजूद बचाने और राजनीति में रहने के लिए कांग्रेस के साथ जाना जरूर हो गया है।

ममता बनर्जी को लेकर क्या कहते हैं जानकार

वहीं राजनीतिक पंडितों का कहना है कि ममता बनर्जी की छवि एक लड़ने वाले नेता के रूप में रही है। इसलिए वह इतने जल्दी हार तो मान नहीं सकती हैं। जानकारों का कहना है कि टीएमसी का कांग्रेस में विलय होना एक तरह से जल्दबाजी होगा। हालांकि यह भी सही है कि पार्टी में इतनी बड़ी टूट के बाद ममता बनर्जी के सामने दोबारा से पार्टी को खड़ा करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। वह 3 बार से मुख्यमंत्री और केंद्रीय विपक्ष के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं, लेकिन आज वह अपने राजनीतिक इतिहास के सबसे बुरे वक्त से गुजर रही हैं।