ट्रेड, टैरिफ और रेयर अर्थ्स: वॉशिंगटन की गुड बुक में क्या दोबारा जगह बना पाएगा पाकिस्तान?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका से रिश्ते सुधारने के लिए लॉबिंग, ट्रेड रियायतों, रेयर अर्थ्स और सुरक्षा सहयोग का सहारा लिया। FATF के दबाव और भारत की कूटनीति के बीच यह एक सोचा-समझा ट्रांजैक्शनल रीसेट था।

Pakistan US Reset Strategy Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ अपने बिगड़े रिश्तों को सुधारने के लिए एक नई और सुनियोजित रणनीति अपनाई है। यह कोशिश भावनाओं या पुराने रिश्तों पर नहीं, बल्कि पूरी तरह ट्रेड, निवेश, सुरक्षा सहयोग और रेयर अर्थ्स जैसे ठोस फायदों पर आधारित है। पाकिस्तान का मकसद साफ है-किसी भी तरह से वॉशिंगटन की “अच्छी किताबों” में वापस आना।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद अचानक क्यों सक्रिय हुआ पाकिस्तान?
14 मई 2025 को, ऑपरेशन सिंदूर के सिर्फ चार दिन बाद, अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के एक वरिष्ठ अधिकारी को एक अहम ईमेल मिला। यह ईमेल भेजा था पॉल डब्ल्यू. जोन्स ने-जो अमेरिका के पूर्व राजदूत रह चुके हैं और अब एक बड़ी लॉबिंग फर्म के जरिए पाकिस्तान की ओर से काम कर रहे हैं। यहीं से पाकिस्तान का “वॉशिंगटन रीसेट प्लान” औपचारिक रूप से शुरू हुआ।
लॉबिंग के ज़रिए अमेरिका तक पहुंचने की रणनीति क्या थी?
पाकिस्तान ने सीधे बात करने के बजाय अमेरिका में प्रभावशाली और भरोसेमंद लॉबिस्ट्स का सहारा लिया। ये लॉबिस्ट कानूनी तौर पर FARA कानून के तहत रजिस्टर्ड थे, ताकि हर कदम पारदर्शी दिखे। ईमेल के साथ एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट भेजा गया, जिसमें पाकिस्तान को अमेरिका के लिए एक आर्थिक और सुरक्षा साझेदार के रूप में पेश किया गया।
FATF का डर पाकिस्तान को कितना परेशान कर रहा है?
इस पूरी कवायद के पीछे एक बड़ा कारण FATF ग्रे लिस्ट का डर भी है। पाकिस्तान जानता है कि अगर वह दोबारा ग्रे लिस्ट में गया, तो उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। इसीलिए उसने अमेरिका से FATF से जुड़े मुद्दों पर चुपचाप बातचीत की कोशिश की, खासकर तब जब भारत पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबूत पेश करने की तैयारी कर रहा था।
अमेरिका को क्या-क्या ऑफर दे रहा है पाकिस्तान?
- पाकिस्तान का ऑफर पूरी तरह ट्रांजैक्शनल है।
- अमेरिका से ज्यादा कृषि और ऊर्जा उत्पाद खरीदने की पेशकश
- अमेरिकी सामान पर टैरिफ घटाने का वादा
- ट्रेड बैलेंस सुधारने की बात
- अमेरिकी कंपनियों को फास्ट-ट्रैक निवेश सुविधा
- माइनिंग, एनर्जी और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में खास रियायतें
- क्या रेयर अर्थ्स पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार हैं?
- पाकिस्तान ने खुद को रेयर अर्थ्स और महत्वपूर्ण खनिजों के हब के रूप में पेश किया है।
- कॉपर, लिथियम, कोबाल्ट, निकल और दुर्लभ खनिज-जिनकी कीमत ट्रिलियन डॉलर बताई गई-अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन के लिए बेहद अहम हैं।
इसी आधार पर पाकिस्तान ने अमेरिका से द्विपक्षीय क्रिटिकल मिनरल एग्रीमेंट की मांग रखी।
सुरक्षा सहयोग के नाम पर पाकिस्तान क्या संदेश दे रहा है?
पाकिस्तान ने दावा किया कि वह आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का भरोसेमंद साझेदार है। ISIS और TTP के खिलाफ कार्रवाई, अफगानिस्तान में छोड़े गए अमेरिकी हथियारों की बरामदगी और काउंटर-टेरर ऑपरेशन-इन सबको उसने अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश किया।
व्हाइट हाउस तक कैसे पहुंचा यह प्लान?
कुछ ही हफ्तों में यह रणनीति रंग लाई। 18 जून को पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस बुलाया गया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात हुई। इसके बाद खनिज और ऊर्जा सहयोग की सार्वजनिक घोषणा हुई।
क्या यह पाकिस्तान-अमेरिका रिश्तों का नया अध्याय है?
कुल मिलाकर, यह पाकिस्तान की एक सोची-समझी, कानूनी और रणनीतिक कोशिश है, जिसमें वह खुद को भावनात्मक सहयोगी नहीं बल्कि अमेरिका के लिए एक उपयोगी रणनीतिक संपत्ति के रूप में पेश कर रहा है। क्या यह ट्रांजैक्शनल रीसेट लंबे समय तक टिक पाएगा?
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