ट्रंप के 'सीज़फायर खत्म' बयान के बाद US ने ईरान पर फिर हवाई हमले किए। इरानशहर में 1 की मौत हुई। होर्मुज जलडमरूमध्य, जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव से वैश्विक चिंता बढ़ गई।

वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया का बारूद एक बार फिर सुलग उठा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बेहद चौंकाने वाली घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी वायुसेना के युद्धक विमानों ने लगातार दूसरी रात ईरान के आसमान को अपनी गर्जना से दहला दिया। बुधवार को हुए इन भीषण हमलों ने न केवल दोनों देशों के बीच पिछले महीने हुए अंतरिम युद्धविराम को पूरी तरह दफन कर दिया, बल्कि पूरी दुनिया को एक बड़े वैश्विक ऊर्जा संकट और संभावित युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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ट्रंप का वो एक बयान...और टूट गया शांति का भ्रम

इस खूनी संघर्ष की पटकथा तुर्की में होने वाली NATO समिट से ठीक पहले लिखी गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने आकर बेहद कड़े शब्दों में कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ लड़ाई रोकने का समझौता 'खत्म' हो चुका है। ट्रंप ने कहा, "मैं उनसे कोई डील नहीं करना चाहता। मुझे वे बहुत बेईमान लोग लगे।" इसके तुरंत बाद US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर चौतरफा हमलों का आदेश दे दिया। अमेरिकी सेना का दावा है कि ये हमले मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों का बदला हैं, जिसके लिए वाशिंगटन सीधे तौर पर तेहरान को ज़िम्मेदार ठहराता है।

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इरानशहर में गूंजे धमाके: पहली मौत और दहला देने वाला मंजर

रात के सन्नाटे को चीरते हुए करीब 12:30 बजे दक्षिण-पूर्वी ईरान के इरानशहर में चार ज़ोरदार धमाके हुए। अमेरिकी मिसाइलें सीधे हवाई अड्डे की फ्लाइट फैसिलिटी बिल्डिंग और मौसम केंद्र से टकराईं। इस हमले में ड्यूटी पर तैनात एक बेकसूर फायरफाइटर खालिद कादरी की दर्दनाक मौत हो गई। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने इस मौत की पुष्टि की है। इसके अलावा ईरान के कई बड़े बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों को मलबे में तब्दील कर दिया गया।

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तबाही का पूरा नक्शा: वो 10 जगहें जहां अमेरिकी मिसाइलों ने बरपाया कहर

रॉयटर्स के मुताबिक, बुधवार रात का यह ऑपरेशन पहले दिन से कहीं अधिक व्यापक और आक्रामक था। अमेरिकी हमलों ने ईरान के इन 10 प्रमुख रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया:

1. बंदर अब्बास: नेवल बेस पर भारी बमबारी

ईरान का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट और बेहद अहम नौसैनिक ठिकाना अमेरिकी मिसाइलों का मुख्य निशाना बना। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ एक के बाद एक 8 भीषण धमाके सुने गए, जिसके बाद ईरानी सेना को अपने एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट करने पड़े।

2. इरानशहर: एयरपोर्ट की इमारतें जमींदोज़

इस दक्षिण-पूर्वी शहर में हुए चार रॉकेट हमलों ने हवाई अड्डे के महत्वपूर्ण हिस्सों को तबाह कर दिया। इसी जगह पर आग बुझाने की कोशिश में जुटे फायरफाइटर खालिद कादरी की जान चली गई।

3. चाबहार: समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल रूम तबाह

ईरान के इस रणनीतिक बंदरगाह पर हुए हमलों ने इसके समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और एक बड़े डिपो को भारी नुकसान पहुँचाया। धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि चाबहार के कई हिस्सों में पूरी तरह बिजली गुल (Blackout) हो गई।

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4. बुशहर प्रांत: IRGC की बैरकें मलबे में तब्दील

यह इलाका ईरान की सबसे आक्रामक सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) का गढ़ माना जाता है। अमेरिकी हवाई हमलों ने यहाँ स्थित IRGC की मजबूत बैरकों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया।

5. अबू मूसा द्वीप: फारस की खाड़ी का रणनीतिक द्वीप दहला

फारस की खाड़ी में स्थित इस बेहद संवेदनशील और विवादित द्वीप पर भी अमेरिकी मिसाइलें गिरीं। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने द्वीप पर कई बड़े धमाकों की लाइव पुष्टि की।

6. सिरिक: तटीय शहर पर हवाई हमला

ईरान के दक्षिणी तटीय शहर सिरिक में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने सिलसिलेवार बमबारी की, जिससे तटीय रक्षा प्रणालियों को नुकसान पहुँचने की आशंका है।

7. ताहरूयी गांव: ग्रामीण इलाकों तक पहुँची जंग की आंच

दक्षिणी सिरिक के पास स्थित इस छोटे से गाँव के नजदीक बैक-टू-बैक तीन ज़ोरदार धमाके सुने गए, जिससे स्थानीय आबादी में भारी दहशत फैल गई।

8. जास्क: नौसैनिक एनर्जी रूट पर हमला

ओमान की खाड़ी के पास स्थित जास्क शहर में कई भीषण धमाके दर्ज किए गए। यह इलाका तेल निर्यात के लिहाज से ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

9. कोनारक: सैन्य हवाई पट्टी के पास धमाके

चाबहार के करीब स्थित इस तटीय शहर में भी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर प्रोजेक्टाइल दागे गए, जिससे पूरा इलाका थर्रा उठा।

10. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): महायुद्ध का केंद्र

यह वो मुख्य जलमार्ग है जहां से दुनिया के कुल तेल की सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा गुज़रता है। यहाँ अमेरिका ने लगातार दो रातों तक भारी सैन्य ऑपरेशन चलाकर ईरान की घेराबंदी की है।

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"दो के बदले एक का बदला": ईरान की वो खौफनाक जवाबी तैयारी!

अमेरिका की इस खुली आक्रामकता के बाद तेहरान का रुख बेहद हिंसक और आक्रामक हो चुका है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने वाशिंगटन पर खुलेआम अंतरराष्ट्रीय शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ईरानी नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे अब पीछे नहीं हटेंगे। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब 'दो-के-बदले-एक' (two-to-one) के अनुपात में देंगे। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े न्यूज़ आउटलेट 'नूरन्यूज़' ने सेना के सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि तेहरान इस पूरे इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर एक "महा-हमले" (Massive Strike) की रूपरेखा तैयार कर चुका है। इससे पहले बुधवार को ही ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागकर अपनी मंशा साफ कर दी थी।

क्या दुनिया झेल पाएगी ईरान का 'परमाणु विनाशक' आखिरी कदम?

इस पूरे तनाव के बीच जो सबसे डराने वाली बात सामने आ रही है, वह है ईरान की संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा समिति का हालिया बयान। ईरान अब अमेरिका को घुटनों पर लाने के लिए तीन ऐसे आत्मघाती और विनाशकारी कदमों पर विचार कर रहा है जो पूरी वैश्विक व्यवस्था को तहस-नहस कर सकते हैं:

  • परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलना: यदि ईरान इस संधि से हटता है, तो वह खुलेआम परमाणु बम बनाने के लिए स्वतंत्र हो जाएगा।
  • परमाणु नीति में बदलाव: तेहरान अपनी रक्षात्मक परमाणु नीति को बदलकर आक्रामक कर सकता है।
  • बाब-अल-मंडेब और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना: होर्मुज जलमार्ग से दुनिया के कुल तेल की सप्लाई का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा गुज़रता है। यदि ईरान ने लाल सागर के प्रवेश द्वार बाब-अल-मंडेब और होर्मुज को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।

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हालांकि ट्रंप ने दावा किया है कि जो कुछ भी होगा वह बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा और तेल के बाजार सुरक्षित रहेंगे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पश्चिम एशिया का यह बारूद का ढेर अब पूरी तरह सुलग चुका है, और एक भी गलत कदम पूरी दुनिया को एक ऐसे अंधेरे कुएं में धकेल सकता है जहां से वापसी मुमकिन नहीं होगी।

क्या अब कूटनीति बचेगी या हथियार बोलेंगे?

लगातार हवाई हमले, जवाबी कार्रवाई की चेतावनियां और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव इस संकट को बेहद संवेदनशील बना रहे हैं। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी है। यदि दोनों पक्ष जल्द तनाव कम करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ते, तो पश्चिम एशिया एक ऐसे संघर्ष का गवाह बन सकता है, जिसका असर वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।