ट्रंप ने US-ईरान बातचीत जारी रखने की बात कही, लेकिन सीज़फायर खत्म बताया। ईरान ने नई वार्ता से इनकार किया। नए अमेरिकी प्रतिबंध और होर्मुज संकट से वैश्विक तनाव बढ़ गया।

Trump Iran Talks: वैश्विक राजनीति के मंच पर एक बार फिर बारूद की गंध तेज हो गई है। यूनाइटेड स्टेट्स अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा नाजुक शांति समझौता (सीज़फ़ायर) आधिकारिक तौर पर इतिहास के पन्नों में दफन हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया और चौंकाने वाले ऐलान ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। दो दिनों तक चले जानलेवा हमलों और होर्मुज स्ट्रेट में भड़की हिंसा के बाद, अब दोनों परमाणु शक्तियों के बीच कूटनीति की डोर पूरी तरह टूटती नजर आ रही है।

ट्रंप का आधी रात को धमाका-"बातचीत होगी, लेकिन सीज़फ़ायर खत्म!"

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक ऐसा पोस्ट शेयर किया, जिसने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने घुटने टेकते हुए अमेरिका से बातचीत जारी रखने की भीख मांगी है। ट्रंप ने लिखा:

"इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ने हमसे 'बातचीत' जारी रखने को कहा है। हम ऐसा करने के लिए राज़ी हो गए हैं, लेकिन यूनाइटेड स्टेट्स ने उन्हें साफ़-साफ़ बता दिया है कि सीज़फ़ायर खत्म हो गया है!"

ट्रंप के इस तेवर ने साफ कर दिया है कि वॉशिंगटन अब ईरान को किसी भी मोर्चे पर ढील देने के मूड में नहीं है। भले ही अमेरिका आगामी मध्यावधि चुनावों को देखते हुए बातचीत की मेज पर बैठने का नाटक कर रहा हो, लेकिन बैकग्राउंड में युद्ध की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

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तेहरान का तुरंत तीखा इंकार-"कोई बातचीत नहीं, यह सब अमेरिकी झूठ है"

डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे पर ईरान ने बेहद आक्रामक और तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की आधिकारिक न्यूज एजेंसी 'फार्स न्यूज' ने बातचीत करने वाली टीम के एक बेहद करीबी और विश्वसनीय सूत्र के हवाले से ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान का कहना है कि अगले हफ्ते स्विट्जरलैंड या इस्लामाबाद में किसी भी टेक्निकल या कूटनीतिक बातचीत की खबरें पूरी तरह से "झूठी हैं और असलियत से उनका कोई लेना-देना नहीं है।" तेहरान ने साफ कर दिया है कि वे अमेरिका के सामने झुककर किसी समझौते की भीख नहीं मांग रहे हैं और भविष्य का कोई भी डिप्लोमैटिक कदम सिर्फ ईरान के ऑफिशियल चैनलों से ही घोषित होगा।

सीक्रेट मीडिएटर एक्टिव: कतर, पाकिस्तान और कुशनर का 'मिशन तेहरान'

जब दोनों देश एक-दूसरे पर मिसाइलें दागने को तैयार हैं, तब पर्दे के पीछे एक बेहद सीक्रेट और हाई-प्रोफाइल कूटनीतिक खेल चल रहा है। 'CBS न्यूज' और 'एक्सियोस' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर इस हफ्ते कतर के अधिकारियों के साथ लगातार गुप्त बैठकें कर रहे थे। दो दिनों तक चले जानलेवा हमलों के बाद कतर और पाकिस्तान के नेगोशिएटर्स इस समय तेहरान की धरती पर मौजूद हैं। वे वाशिंगटन और तेहरान के बीच मंडरा रहे युद्ध के बादलों को छांटने की आखिरी कोशिश कर रहे हैं, हालांकि इस सीक्रेट मिशन में कितनी कामयाबी मिली है, यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है।

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ईरान की हुंकार-"हम कभी सरेंडर नहीं करेंगे, मुस्लिम देश एकजुट हों"

इस बीच ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर और लीड नेगोशिएटर मोहम्मद ग़ालिबफ़ ने अमेरिका को खुली चेतावनी दे दी है। गालिबफ ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि तेहरान कभी भी अमेरिका के प्रतिबंधों और धमकियों के आगे घुटने नहीं टेकेगा। उन्होंने कहा: "अगर किसी भी पल अमेरिकी मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को तोड़ते हैं, तो हम पूरी तरह से बचाव के लिए तैयार हैं और उनके खिलाफ मजबूती से खड़े रहेंगे। संघर्ष ईरान के सरेंडर करने से कभी खत्म नहीं होगा।" इतना ही नहीं, गालिबफ ने दुनिया भर के मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे अमेरिका और इज़राइल के बढ़ते जुल्म के खिलाफ एक साथ आएं और एक मजबूत मोर्चा बनाएं।

होर्मुज स्ट्रेट में ब्लैकआउट और ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हाहाकार

इस जियोपॉलिटिकल ड्रामे की सबसे भारी कीमत वैश्विक अर्थव्यवस्था को चुकानी पड़ रही है। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के राइट हैंड और बड़े फाइनेंशियल फैसिलिटेटर अली अंसारी के खिलाफ नए और बेहद कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। अंसारी पर आरोप है कि वे ईरान के शीर्ष नेतृत्व को फायदा पहुंचाने वाले एक ग्लोबल एसेट्स नेटवर्क को चला रहे हैं।

यह प्रतिबंध होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर ईरान के ताजा हमलों के जवाब में लगाए गए हैं। इन हमलों और तनाव के चलते इस जलडमरूमध्य से होने वाली कमर्शियल शिपिंग में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। चूंकि दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है, इसलिए ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भारी दबाव आ गया है। अगर यह तनाव एक हफ्ते और खिंचा, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे एक नया वैश्विक आर्थिक संकट पैदा होना तय है।