रूसी तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ का दबाव बनाने वाले ट्रंप ने अब पुतिन से डीजल समझौता कर लिया। इसके बाद जेलेंस्की को नया राष्ट्रपति चुनने की सलाह भी दी। क्या अमेरिकी ईंधन की कीमतें इस बदले रुख की सबसे बड़ी वजह हैं? जानिए पूरा मामला।

रूस से तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ का दबाव बनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब खुद रूस से डीजल मंगाने का समझौता कर लिया है। नौ अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से करीब 90 मिनट की बातचीत के बाद ट्रंप ने रूसी डीजल की आपूर्ति का ऐलान किया। अगले ही दिन उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को बदलने की मांग भी उठा दी। सवाल है कि रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव की बात करने वाले ट्रंप अब मॉस्को के साथ हाथ क्यों मिला रहे हैं? इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका में ईंधन की कीमतें और घरेलू राजनीतिक दबाव हैं।

भारत पर रूसी तेल को लेकर दबाव, अमेरिका ने खुद क्यों खरीदा डीजल?

ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर टैरिफ का दबाव बनाया था। लेकिन अब अमेरिका ने रूस से डीजल मंगाने के लिए प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, रूस पहले चरण में तीन लाख टन से ज्यादा डीजल की आपूर्ति करेगा, जबकि आगे और खेप आने की योजना है।

इस फैसले के पीछे अमेरिकी बाजार में महंगे ईंधन की समस्या है। डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, खेती और माल ढुलाई की लागत बढ़ती है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन पर कीमतों को काबू करने का दबाव भी है। हालांकि, विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं कि रूसी डीजल की आपूर्ति से कीमतों में कितनी वास्तविक राहत मिलेगी।

यह भी पढ़ें: कहीं जाने की जरूरत नहीं, मोबाइल से ऐसे चेक और अपडेट करें UP Voter List में अपना नाम

पुतिन से समझौते के बाद जेलेंस्की पर क्यों भड़के ट्रंप?

10 अक्टूबर को ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन को ऐसा नया नेता चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता कर सके। उन्होंने रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों को अमेरिकी ईंधन कीमतों से भी जोड़ा। जेलेंस्की ने रूसी डीजल पर प्रतिबंधों में ढील देने के फैसले की आलोचना की। उनका तर्क है कि रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाला पैसा युद्ध जारी रखने में मदद कर सकता है। यूक्रेन का कहना है कि वह रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकने को तैयार है, जब रूस भी यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले बंद करे।

क्या ट्रंप की नीति में दोहरा मापदंड है?

भारत पर रूसी तेल को लेकर दबाव और अमेरिका का रूस से डीजल खरीदने का फैसला नीतिगत विरोधाभास पर सवाल उठाता है। हालांकि, दोनों मामलों की शर्तें अलग हैं: भारत कच्चा तेल खरीदता रहा है, जबकि मौजूदा अमेरिकी समझौता डीजल की आपूर्ति और प्रतिबंधों में अस्थायी छूट से जुड़ा है। फिलहाल, ट्रंप का कदम दिखाता है कि विदेश नीति में रणनीतिक दबाव के साथ घरेलू ऊर्जा जरूरतें भी अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन इस समझौते से यूक्रेन युद्ध खत्म होने की राह आसान होगी या रूस को आर्थिक फायदा मिलेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

यह भी पढ़ें: आराधना मिश्रा के चार्ज लेते ही भड़के अजय राय, धरने पर बैठे! लखनऊ में जूते-चप्पल तक चले