Donald Trump Iran warning: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समझौते के लिए सख्त चेतावनी दी है। अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। खार्ग आइलैंड और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ गया है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तीखा होता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर तय समय सीमा से पहले कोई समझौता नहीं होता, तो हालात इतने गंभीर हो सकते हैं कि “एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।”
ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दिया। उन्होंने लिखा कि वह ऐसा नहीं चाहते, लेकिन स्थिति तेजी से उस दिशा में बढ़ सकती है। उनका कहना है कि अगर हालात बदले तो यह दुनिया के इतिहास का अहम मोड़ साबित हो सकता है।
समझौते के लिए दी गई डेडलाइन
ट्रंप ने ईरान को समझौते के लिए मंगलवार रात 8 बजे (वॉशिंगटन समय) तक का समय दिया है। भारतीय समय के अनुसार यह डेडलाइन बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे तक है।इस बीच अमेरिका का कहना है कि अगर ईरान तय शर्तों पर बातचीत नहीं करता, तो उसके सैन्य और रणनीतिक ढांचे पर और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति का बयान
अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि युद्ध के सैन्य उद्देश्य काफी हद तक पूरे हो चुके हैं और अब यह देखना होगा कि आगे क्या फैसला लिया जाता है। वेंस के मुताबिक, ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी कमजोर किया गया है और फारस की खाड़ी में उसकी रणनीतिक ताकत पर भी असर पड़ा है। उनका कहना है कि अब यह फैसला ईरान के लोगों और उसके नेतृत्व पर निर्भर करेगा कि वह आगे किस रास्ते को चुनते हैं।
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खार्ग आइलैंड पर बड़े हमले
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें Kharg Island भी शामिल है, जो ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र माना जाता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां 50 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए हैं। इन हमलों को ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बढ़ा दबाव
तनाव की एक बड़ी वजह Strait of Hormuz भी है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिका चाहता है कि इस मार्ग को खुला रखा जाए और समुद्री यातायात बाधित न हो। इसी मुद्दे को लेकर ईरान पर दबाव बढ़ाया जा रहा है।
ईरान ने बातचीत से किया इनकार
हालांकि ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। साउथ अफ्रीका में स्थित ईरानी दूतावास ने ट्रंप की धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को ईरान की प्राचीन सभ्यता से ऐसा जवाब मिलेगा, जिसे वे भूल नहीं पाएंगे। ईरानी मीडिया के मुताबिक, हालिया धमकियों के बाद कई कूटनीतिक चैनल और अप्रत्यक्ष वार्ताएं भी रुक गई हैं।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा खतरा
तनाव के बीच ईरान ने संकेत दिया है कि अगर हमले जारी रहते हैं तो वह खाड़ी क्षेत्र में अपने विरोधियों के बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में एक जहाज और सऊदी अरब में कुछ औद्योगिक ठिकानों पर हमले किए गए हैं, जिनका संबंध अमेरिकी कंपनियों से बताया जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों का मकसद ईरान पर दबाव बनाना है, ताकि वह जल्द किसी समझौते के लिए तैयार हो जाए। हालांकि ईरान फिलहाल सख्त रुख अपनाए हुए है और उसने साफ कर दिया है कि जब तक हमले नहीं रुकते, बातचीत संभव नहीं है। अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं। क्या तनाव और बढ़ेगा या कूटनीतिक बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलेगा।
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