Trump Iran Statement: ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के विवादित बयानों पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा। राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने ट्रंप की टिप्पणियों को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए मोदी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। जानिए पूरा मामला।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में भारी जनसमूह के शामिल होने के दावों के बाद भारत में भी इस मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस ने ट्रंप की टिप्पणियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उसकी चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।

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ट्रंप के किन बयानों पर मचा विवाद?

मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वायरल बयानों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कई तीखी टिप्पणियां कीं। इनमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि अमेरिका ने युद्ध में ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया और यह भी दावा किया कि "एक ही कार्रवाई में सभी को खत्म किया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा।"

इन बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। हालांकि, इन कथित बयानों के संदर्भ और आधिकारिक रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं। ऐसे में किसी भी टिप्पणी को उसके आधिकारिक स्रोत और पूरे संदर्भ के साथ देखना महत्वपूर्ण है।

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कांग्रेस ने सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप के बयानों को "भड़काऊ" और "गैर-जिम्मेदाराना" बताया। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान के सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और भारत से भी प्रतिनिधि श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि ट्रंप की टिप्पणियां पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों के लिए नुकसानदेह हैं। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को हिंसा को बढ़ावा देने वाली टिप्पणियों की स्पष्ट शब्दों में निंदा करनी चाहिए।

पश्चिम एशिया की घटनाओं पर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी

ईरान से जुड़े घटनाक्रम को लेकर देश की राजनीतिक पार्टियां अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रही हैं। जहां कांग्रेस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं, वहीं सरकार की ओर से इस मामले में इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत के ऊर्जा एवं व्यापारिक हित भी इससे जुड़े हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कूटनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

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