30 हजार का इनाम, फरार पति, दूसरी पोस्टमॉर्टम पर कानूनी लड़ाई और CBI जांच की मांग-क्या ट्विशा शर्मा मौत केस में कोई बड़ा राज छिपा है? समर्थ सिंह की तलाश तेज, SIT जांच, NCW एक्शन, CCTV-फोरेंसिक जांच और भोपाल से दिल्ली तक बढ़ता दबाव कई सवाल खड़े कर रहा है।
भोपाल: मशहूर एक्ट्रेस और पूर्व मॉडल ट्विशा शर्मा की रहस्यमयी मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जैसे-जैसे इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खुल रही हैं, सस्पेंस और गहराता जा रहा है। भोपाल पुलिस ने अब ट्विशा के लापता पति समर्थ सिंह पर शिकंजा कसते हुए उसकी गिरफ्तारी की सूचना देने पर मिलने वाले इनाम को ₹10,000 से बढ़ाकर सीधे ₹30,000 कर दिया है। दहेज हत्या के आरोपों से घिरा समर्थ इस समय फरार है, और उसके देश छोड़कर भागने की आशंका के बीच 'लुकआउट नोटिस' भी जारी कर दिया गया है।


बेल्ट का वो निशान और 'SIT' की बंद कमरों में तफ्तीश
भोपाल के पुलिस कमिश्नर संजय सिंह के नेतृत्व में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस मामले की हर मुमकिन एंगल से जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच पहली नजर में इसे आत्महत्या का मामला बता रही है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि ट्विशा की गर्दन पर मिले निशान किसी आम रस्सी के नहीं, बल्कि बेल्ट से फांसी लगाने के हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह वाकई आत्महत्या थी, या फिर किसी गहरी साजिश के तहत इसे अंजाम दिया गया? समर्थ सिंह का अचानक गायब हो जाना और पुलिस के चंगुल से दूर भागना, उसकी संलिप्तता की तरफ गहरा इशारा कर रहा है।

माइनस 80 डिग्री का आदेश और 'सत्य' को महफूज रखने की जंग
इस केस में एक नया मोड़ तब आया जब भोपाल की एक स्थानीय अदालत ने ट्विशा के शव का मध्य प्रदेश से बाहर दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की याचिका को खारिज कर दिया। जज अनुदित शर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य के बाहर री-पोस्टमॉर्टम की अनुमति देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने शव को खराब होने से बचाने के लिए एक बेहद चौंकाने वाला निर्देश दिया। "AIIMS भोपाल का मौजूदा मुर्दाघर शव को केवल -4°C पर रख सकता है, जो सिर्फ 4 से 5 दिनों के लिए पर्याप्त है। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल केस के सबूतों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए शव को -80°C के स्पेशल फ्रीजर में रखना होगा।" अदालत के इस कड़े रुख के बाद, न्याय की आस में ट्विशा के टूटे हुए परिवार ने अब सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।

मुख्यमंत्री का भरोसा और 'CBI' जांच की आहट
ट्विशा के पिता, नव निधि शर्मा ने बुधवार को रिटायर्ड सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की। इस भावुक मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने परिवार को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि राज्य सरकार जल्द ही केंद्र को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच देश की सबसे बड़ी एजेंसी CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को सौंपने की सिफारिश करेगी। सीएम ने यह भी वादा किया कि अगर ऊपरी अदालत आदेश देती है, तो राज्य सरकार अपने खर्च पर ट्विशा के पार्थिव शरीर को AIIMS दिल्ली भेजने का पूरा बंदोबस्त करेगी। इसके साथ ही राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की पुरजोर वकालत की है।

लाल परेड ग्राउंड पर आक्रोश: 'सास' की कुर्सी पर संकट!
बुधवार को भोपाल की सड़कों पर एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब रिटायर्ड सैनिकों के एक समूह ने सेवानिवृत्त जनरल श्याम सुंदर श्रीवास्तव के नेतृत्व में न्याय की मांग को लेकर एक विशाल बाइक रैली निकाली। यह आक्रोशित हुजूम लाल परेड ग्राउंड पहुंचा और वहां जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
परिवार और प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सिर्फ समर्थ पर ही नहीं, बल्कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह पर भी फूटा है, जो एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं और वर्तमान में जिला उपभोक्ता फोरम में पदस्थ हैं। राज्यपाल मंगूभाई पटेल को पत्र भेजकर मांग की गई है कि चूंकि गिरिबाला सिंह के खिलाफ भी दहेज हत्या की FIR दर्ज है, इसलिए उन्हें तुरंत न्यायिक पद से हटाया जाए। इस पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद राजपूत ने भी कड़े एक्शन के संकेत देते हुए कहा है, "पूरा राज्य पीड़ित परिवार के साथ है, रिपोर्ट आते ही सख्त कार्रवाई होगी।"

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का अल्टीमेटम: 7 दिन में चाहिए जवाब
इस दर्दनाक दास्तां का संज्ञान अब दिल्ली तक पहुंच चुका है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन और DGP कैलाश मकवाना को सख्त लहजे में पत्र लिखा है। आयोग ने साफ कहा है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। NCW ने पुलिस प्रशासन से 7 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी है, जिसमें समर्थ के पासपोर्ट की जब्ती, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR), और सबसे महत्वपूर्ण-ट्विशा के पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी मांगी गई है।
अब देखना यह है कि ₹30,000 का यह इनाम और चारों तरफ से बढ़ता दबाव क्या फरार समर्थ सिंह को पुलिस के सामने घुटने टेकने पर मजबूर कर पाएगा, या फिर ट्विशा की मौत का यह राज फाइलों में ही दफन रह जाएगा?


