UP Micro Irrigation Project 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत गोरखपुर और संत कबीर नगर में माइक्रो इरिगेशन की पायलट परियोजनाएं तैयार की जा रही हैं। PPIN तकनीक से जल उपयोग दक्षता 75% तक बढ़ेगी और रबी-खरीफ दोनों फसलों में सीधा लाभ मिलेगा। 

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन के अनुसार उत्तर प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग प्रदेश में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने और किसानों को अधिक लाभ देने के उद्देश्य से माइक्रो इरिगेशन को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। इसी क्रम में केंद्र सरकार की' मॉडर्नाइजेशन ऑफ कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट' (MCADWM) योजना के तहत गोरखपुर और संत कबीर नगर जिलों में माइक्रो इरिगेशन की पायलट परियोजनाएं तैयार की जा रही हैं, जो प्रदेश की कृषि व्यवस्था में गेमचेंजर साबित हो सकती हैं।

गोरखपुर और संतकबीर नगर में बन रहीं 6 पायलट परियोजनाएं

सिंचाई विभाग द्वारा केंद्रीय परियोजना के तहत कुल 6 पायलट माइक्रो इरिगेशन प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है। इनमें से 4 परियोजनाओं की फाइनल DPR तैयार हो चुकी है, 2 परियोजनाओं के कमांड एरिया पर विचार अंतिम चरण में है। इन परियोजनाओं का कुल CCA (Cultivable Command Area) लगभग 2149 हेक्टेयर है। इनमें जो क्लस्टर शामिल हैं, उनमें गोरखपुर के बांसगांव, मलांव, मझगवां, राजधनी, बरगदवां, जंगल गौरी-1 और संत कबीर नगर के प्रजापतिपुर क्लस्ट हैं।र स्वीकृति मिलते ही फरवरी 2026 के अंत तक सभी क्लस्टरों में परियोजनाओं का संचालन शुरू होने की उम्मीद है, जिससे हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

75% तक बढ़ेगी जल उपयोग दक्षता, पानी की बर्बादी पर लगेगी रोक

इन परियोजनाओं में PPIN (Pressurized Piped Irrigation Network) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके जरिए जलस्रोत से पानी सीधे खेतों तक पहुंचेगा, पानी की बर्बादी में भारी कमी आएगी और जल उपयोग दक्षता में लगभग 75% की वृद्धि होगी। यह तकनीक प्रदेश में PDMC (Per Drop More Crop) की अवधारणा को मजबूत करेगी।

ड्रिप-स्प्रिंकलर से बढ़ेगी पैदावार, घटेगी लागत

परियोजना के तहत किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम के लिए सहायता, कम पानी में अधिक फसल उत्पादन, रबी और खरीफ दोनों सीजन में फायदा मिलेगा। इससे खेती की लागत घटेगी और किसानों की आय में इजाफा होगा। हर क्लस्टर में गठित वाटर यूजर सोसाइटी (WUS) सिंचाई नेटवर्क के संचालन, रखरखाव और निगरानी, किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करेगी, जिससे परियोजनाएं लंबे समय तक प्रभावी बनी रहें।

पूरे प्रदेश में होगा विस्तार, सतत कृषि को मिलेगा बढ़ावा

इन पायलट परियोजनाओं की सफलता के बाद माइक्रो इरिगेशन मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। इससे किसानों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा, खेती में आधुनिक तकनीक, सतत कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को साकार करेगा।