उत्तर प्रदेश में RTE 2026-27 के पहले चरण में 2,61,501 आवेदन आए, जो पिछले साल से 97% ज्यादा हैं। योगी सरकार की पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के कारण EWS और DG वर्ग के अभिभावकों में योजना के प्रति भरोसा बढ़ा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) योजना के प्रति अभिभावकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत वर्ष 2026–27 के प्रथम चरण में रिकॉर्ड संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। इस वर्ष पहले चरण में कुल 2,61,501 आवेदन आए हैं, जबकि पिछले वर्ष 2025–26 में इसी अवधि में 1,32,446 आवेदन प्राप्त हुए थे। इस तरह आवेदनों में लगभग 97 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के अभिभावकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर जागरूकता और विश्वास पहले से ज्यादा मजबूत हुआ है।

योगी सरकार की पहल: पारदर्शिता और सरलीकरण पर जोर

Yogi Adityanath सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, सरल प्रक्रिया और व्यापक जागरूकता अभियान पर खास ध्यान दिया। बेसिक शिक्षा विभाग ने अभिभावकों के लिए संवाद कार्यक्रम चलाए। ग्राम और वार्ड स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए गए। साथ ही स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया, जिससे योजना की जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुंची। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को भी आसान और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया। इससे ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों के अभिभावकों को भी बिना किसी परेशानी के आवेदन करने का मौका मिला। हेल्पडेस्क की सुविधा, समय पर सूचना उपलब्ध कराना और विद्यालयों की जवाबदेही तय करने जैसे कदमों से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनी।

RTE योजना: EWS और DG वर्ग के बच्चों को लाभ

आरटीई योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित वर्ग (DG) के बच्चों को निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश दिया जाता है। आवेदनों की बढ़ती संख्या से साफ है कि अब अधिक अभिभावक इस अवसर को समझ रहे हैं और अपने बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं। नई शिक्षा नीति, डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार और विशेष नामांकन अभियान ने मिलकर समावेशी शिक्षा को मजबूत आधार दिया है।

सामाजिक बदलाव का संकेत: शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आवेदनों में लगभग दोगुनी वृद्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह समाज में आए सकारात्मक बदलाव का संकेत भी है। अब अभिभावक अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए गुणवत्तापूर्ण स्कूल शिक्षा को जरूरी मान रहे हैं और योजना का लाभ लेने के लिए सक्रिय रूप से आगे आ रहे हैं।सरकार का लक्ष्य है कि आरटीई योजना के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र बच्चों को लाभ मिले और प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और निष्पक्ष बनी रहे।