New Viral Videos: गणतंत्र दिवस पर हिजाब पहनकर परफॉर्मेंस, वीडियो वायरल-मचा बवाल
यूपी के गोंडा में एक स्कूल के गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान एक घटना ने विवाद खड़ा कर दिया है। यहां एक परफॉर्मेंस में छात्राओं को हिजाब पहने देखा गया। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं, साथ ही पुलिस कार्रवाई की भी मांग की गई।

यूपी के स्कूल में गणतंत्र दिवस पर हिजाब को लेकर बवाल और बहस
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के मनकापुर में गुरु चरण ए.आर. इंटर कॉलेज में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान हुई एक घटना के बाद विवाद खड़ा हो गया है। 26 जनवरी को मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस भारतीय संविधान को अपनाने का प्रतीक है, जो सभी नागरिकों के लिए समानता, धर्म की स्वतंत्रता और सम्मान की गारंटी देता है। हिजाब के इस्तेमाल पर तब बवाल मच गया जब कई लोगों ने आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम में एक खास समुदाय के सम्मान का मजाक उड़ाया गया।
ए.आर इंटर कॉलेज, गोंडा।
गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले हिजाब का इस्तेमाल किया गया।
गणतंत्र दिवस भारतीय संविधान को अपनाने का प्रतीक है।
ये लोग गणतंत्र दिवस पर भी बुर्के को लेकर इतने क्यों जुनूनी हैं? pic.twitter.com/TitZYjwBxz— هارون خان (@iamharunkhan) 29 जनवरी, 2026
ऑनलाइन शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, स्कूल के कार्यक्रम में एक स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले हिजाब का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया और उसका अपमान किया गया। दावा किया जा रहा है कि इस एक्ट में शामिल छात्राएं दूसरे समुदाय की थीं। यह घटना कथित तौर पर गणतंत्र दिवस के आधिकारिक समारोह के दौरान स्टाफ, छात्रों और स्थानीय लोगों के सामने हुई।
स्कूल प्रशासन या जिला अधिकारियों की ओर से अभी तक परफॉर्मेंस के असली मकसद या उसके पीछे की मंशा को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
इस घटना ने क्यों भड़काईं तीखी भावनाएं
कई लोगों के लिए यह मुद्दा सिर्फ एक स्कूल कार्यक्रम से कहीं बढ़कर है। मुस्लिम महिलाएं हिजाब को एक धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में देखती हैं, जबकि गणतंत्र दिवस को एक राष्ट्रीय अवसर माना जाता है जो एकता, सम्मान और संवैधानिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है। इस घटना के आलोचकों का तर्क है कि ऐसे दिन पर किसी भी धार्मिक पोशाक का मजाक उड़ाना या उसका गलत इस्तेमाल करना संविधान की भावना के खिलाफ है। इस विचार के समर्थकों का कहना है कि गणतंत्र दिवस को धार्मिक मतभेदों को गहरा करने के बजाय आपसी सम्मान को बढ़ावा देना चाहिए।
दूसरी ओर, ऑनलाइन कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि किसी राष्ट्रीय कार्यक्रम में धार्मिक कपड़ों को शामिल ही क्यों किया जाना चाहिए, जो दिखाता है कि इस मुद्दे पर जनता की राय कितनी बंटी हुई है।
सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं में दिखा गहरा ध्रुवीकरण
यह घटना जल्द ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गरमागरम बहस का विषय बन गई। प्रतिक्रियाओं में गुस्से और दुख से लेकर मजाक और तीखी आलोचना तक शामिल थी। कई यूजर्स ने इस हरकत की निंदा की और इसे अपमानजनक और असंवेदनशील बताया, खासकर एक राष्ट्रीय उत्सव के दौरान। कुछ ने सवाल किया कि सार्वजनिक बहसों में मुस्लिम महिलाओं और उनकी पोशाक को बार-बार क्यों निशाना बनाया जाता है, चाहे वे हिजाब पहनें या नहीं।
कई यूजर्स ने मुस्लिम महिलाओं के अपनी पसंद के कपड़े पहनने के अधिकार का बचाव किया, यह बताते हुए कि संविधान आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने तर्क दिया कि व्यक्तिगत पहनावा सार्वजनिक अपमान या उपहास का कारण नहीं बनना चाहिए। हालांकि, कुछ पोस्ट ऐसी भी थीं जिनमें कठोर और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, हिजाब की आलोचना की गई और धर्म और समाज के बारे में व्यापक टिप्पणियां की गईं। नफरत फैलाने और सांप्रदायिक तनाव को गहरा करने के लिए दूसरों द्वारा इन टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की गई।
पुलिस कार्रवाई और आधिकारिक प्रतिक्रिया की मांग
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने गोंडा पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस, यूपी के डीजीपी और साइबर क्राइम यूनिट्स को टैग करते हुए उनसे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के कृत्य, अगर जानबूझकर किए गए हैं, तो सार्वजनिक सद्भाव को बिगाड़ सकते हैं और कानून के तहत उनकी जांच की जानी चाहिए।
@gondapolice@Uppolice@dgpup@UPGovt@cyberpolice_up Take Suo Moto Cognizance Against These People Tumhari Astha I Love Muhammad likhne Bolne pe Ahat Ho Jati hai 1300 FIR kia Tha Na ye Shanti Bhang Nahi ho Raha Republic day pe Ye New normal banaya ja raha hai Sharm Aati Hai ?
— Mayn Zalik 🔻 (@XunizXan) 29 जनवरी, 2026
अभी तक, किसी भी पुलिस शिकायत, एफआईआर, या आधिकारिक जांच की कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों ने यह भी पुष्टि नहीं की है कि क्या इस परफॉर्मेंस ने किसी स्कूल दिशानिर्देश या कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
धर्म, स्वतंत्रता और सार्वजनिक स्थान पर एक व्यापक बहस
इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक प्रतीकों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आसपास एक बड़ी राष्ट्रीय बहस को उजागर कर दिया है। कुछ लोगों का मानना है कि धार्मिक पहचान को आधिकारिक समारोहों से दूर रहना चाहिए, जबकि अन्य का तर्क है कि समावेश का मतलब विविधता को अनुमति देना है, उसे दबाना नहीं।
इसमें गलत क्या है कोई बताएगा? https://t.co/9sWJwmtC9O
— Being Political (@BeingPolitical1) 29 जनवरी, 2026
कई टिप्पणीकारों ने ऑनलाइन गाली-गलौज के बजाय शांत चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि छात्र अक्सर वयस्कों और सोशल मीडिया की कहानियों से प्रभावित होते हैं, और स्कूलों को ऐसी जगह होनी चाहिए जो सम्मान, समझ और संवैधानिक मूल्यों को सिखाएं।
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