शांति वार्ता के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 2,000 और सैनिक भेजे हैं, जिससे हालिया तैनाती 7,000 हो गई है। यह 50,000 सैनिकों की पिछली तैनाती के अतिरिक्त है और जमीनी जंग की आशंका को बढ़ाता है।

वाशिंगटन: एक तरफ पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को राष्ट्रपति ट्रंप ने समर्थन दिया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 2,000 और सैनिक भेज दिए हैं। पेंटागन ने 82वीं एयरबोर्न डिवीजन को तैनात करने का आदेश दिया है। ये सैनिक अगले दो दिनों के अंदर मिडिल ईस्ट पहुंच जाएंगे। इसके साथ ही, इस इलाके में हाल में भेजे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या 7,000 हो गई है। यह तैनाती उन 50,000 अमेरिकी सैनिकों के अलावा है, जो पहले से ही युद्ध की आशंका के चलते अलग-अलग ठिकानों पर मौजूद हैं। इन रिपोर्ट्स के बीच कि अमेरिका जमीनी जंग की तैयारी कर रहा है, सैनिकों की यह नई तैनाती काफी अहम है।

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ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने बातचीत में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी। खबर है कि पाकिस्तान ने अमेरिका का तैयार किया हुआ 15-पॉइंट का शांति प्रस्ताव ईरान को सौंप दिया है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि ईरान इस प्रस्ताव के आधार पर बातचीत के लिए तैयार होगा या नहीं, और क्या इजरायल इसका समर्थन करेगा। इससे पहले ईरान, ट्रंप के उन दावों को खुले तौर पर खारिज कर चुका है, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है। ट्रंप के हमले रोकने की बात कहने के बावजूद इजरायल तेहरान में सरकारी ठिकानों पर हमले जारी रखे हुए है। जवाब में ईरान भी हमले कर रहा है।

इस बीच, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को ईरानी विदेश मंत्री से फोन पर बात की। चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि सभी पक्ष शांति के मौकों का फायदा उठाएंगे और जल्द ही बातचीत शुरू करेंगे। चीन, ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार और एक पुराना सहयोगी देश है।

क्या यह जमीनी जंग की तैयारी है?

एक तरफ ये सब चल रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका हमले की तैयारी तेज करता दिख रहा है। सैनिकों की यह नई तैनाती ईरान के उन आरोपों को सही साबित करती है कि अमेरिका कूटनीतिक कोशिशों की आड़ में हमले की तैयारी कर रहा है।

82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 2,000 सैनिक मिडिल ईस्ट पहुंच रहे हैं। यह डिवीजन 3,000 सैनिकों की एक खास यूनिट है, जिसे दुनिया में कहीं भी 18 घंटे के अंदर तैनात किया जा सकता है। मिडिल ईस्ट भेजे जा रहे सैनिक 'इमीडिएट रिस्पॉन्स फोर्स' का हिस्सा हैं। इस टुकड़ी का नेतृत्व डिवीजन कमांडर मेजर जनरल ब्रैंडन आर. टेग्टमेयर कर रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने पेंटागन के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि आने वाले दिनों में इसी ब्रिगेड से और भी सैनिक भेजे जा सकते हैं।

फिलहाल, 4,500 मरीन सैनिक भी मिडिल ईस्ट के रास्ते में हैं। पेंटागन ने इस सैन्य अभियान को 'एपिक फ्यूरी' (Epic Fury) नाम दिया है, जिसके लिए मिडिल ईस्ट, यूरोप और अमेरिका से करीब 50,000 सैनिक पहले से ही तैनात किए जा चुके हैं।