Who is Preeti Pawar: ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को 7 गोल्ड मेडल मिल चुके हैं। जिसमें तीन तो बेटियां लेकर आई हैं। तीनों गोल्डन गर्ल में से जूडो में अस्मिता डे और बॉक्सिंग में प्रीति पवार (54 KG) व जैस्मिन लांबोरिया स्वर्ण पदक जीता है।
“म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के?” दंगल फिल्म का यह डायलॉग आज सच साबित होता दिख रहा है। क्योंकि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की बेटियों ने कमाल कर दिया है। अस्मिता डे और प्रीति के बाद अब जैस्मिन लांबोरिया ने विमेंस बॉक्सिंग की 57 KG कैटेगरी के फाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकाएला वॉल्स को हराकर गोल्ड जीत लिया है। तो आइए जानते हैं भारत की इन तीनों बेटियों की कहानी....
कौन हैं अस्मिता डे
- अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत को जूडो में पहला गोल्ड मेडल दिलाने वाली खिलाड़ी बन गई हैं। उन्होंने शुक्रवार को फाइनल में शानदार वापसी करते हुए कनाडा की हेइडी क्वाच को हराकर यह मेडल जीता है। वह इससे पहले 2023 जूनियर एशिया कप में स्वर्ण और 2025 कासाब्लैंका अफ्रीकन ओपन में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।
- 23 साल की अस्मिता डे मूल रूप से त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली हैं। वह बेहद साधारण परिवार से आती हैं। उनका घर मिट्टी का है। उनके पिता अर्जुन कुमार डे एक साइकिल मैकेनिक की दुकान चलाते थे। 2025 में एक गंभीर बीमारी के चलते पिता का निधन हो गया था। लेकिन इतने बडे़ दुख और संघर्षों के बावजूद उन्होंने अपनी प्रैक्टिस जारी रखी।
कौन है प्रीति पवार
- 1 जुलाई को भारत की बेटी प्रीति पवार ने मुक्केबाजी में गोल्ड जीता है। उन्होंने 54 किलोग्राम मुक्केबाजी वर्ग में कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को फाइनल में हराते हुए यह जीत हासिल की। इससे पहले प्रीति ने 2022 एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज और 2023 एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। 2024 पेरिस ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वहीं इसी साल 2026 एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता।
- बता दें कि 23 अक्टूबर 2003 को हरियाणा के भिवानी में जन्मीं प्रीति पवार भी साधारण परिवार से तालुक रखती हैं। हालांकि यह बात अलग है कि उनके परिवार का स्पोर्ट्स से पुराना नाता रहा है। क्योंकि उनके चाचा विनोद पवार हरियाणा के चर्चित मुक्केबाज रह चुके हैं। लेकिन गोल्ड मेडल नहीं जीत सके। जब प्रीति 14 साल की थीं, तभी चाचा ने उनको बताया था कि उन्हें आगे जाकर गोल्ड लाना है। तभी से वह मुक्केबाजी की प्रैक्टिस करने लगी थीं। प्रीति ने अपने चाचा के अकादमी से ही मुक्केबाजी की ट्रेनिंग ली और फिर साल 2020 में खेलो इंडिया यूथ में रजत पदक जीता।
कौन हैं जैस्मिन लांबोरिया?
- जैस्मिन लांबोरिया भी भारत की गोल्डन गर्ल हैं। उन्होंने आज 1 जुलाई को विमेंस बॉक्सिंग की 57 KG कैटेगरी के फाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकाएला वॉल्स को हराकर गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। बता दें कि इससे पहले जैस्मिन ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता था। लेकिन उनका लक्षय था कि वह अब चार साल बाद गोल्ड ही जीतेंगी। इसके लिए उन्होंने दिन रात मेहनत की।
- बता दें कि जैस्मिन लांबोरिया भी हरियाणा के भिवानी जिले की रहने वाली हैं। वह एशियाई खेलों के गोल्ड मेडलिस्ट रहे दिग्गज बॉक्सर हवा सिंह की परपोती हैं। उनके परिवार लोग बॉक्सिंग से जुड़े रहे हैं। इसिलए उनकी भी बचपन से ही गहरी रुचि बॉक्सिंग में थी। यही वजह रही कि बचपन में देखा सपना और मेहनत आज रंग लेकर आई है।


