अमेरिका आधिकारिक तौर पर WHO से बाहर हो गया है। ट्रंप प्रशासन ने संगठन पर चीन-समर्थक होने का आरोप लगाया था। अमेरिका ने 1 साल का नोटिस पूरा किया, लेकिन 2,300 करोड़ का बकाया नहीं चुकाया है।
नई दिल्ली: अमेरिका आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर हो गया है। अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक पुराना लक्ष्य पूरा हो गया है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में ही WHO से बाहर निकलने का फैसला सुनाया था और दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में इसे लागू कर दिया था।
लेकिन, WHO का एक नियम है। किसी भी देश को बाहर जाने के लिए कम से कम 1 साल का नोटिस पीरियड पूरा करना होता है और बकाया रकम चुकानी होती है। इसी के तहत ट्रंप ने पिछले साल जनवरी में यह आदेश जारी किया था और इस साल WHO से बाहर हो गया। अमेरिका ने संगठन के 2,300 करोड़ रुपये नहीं चुकाए हैं, और अब यह पैसा डूबत खाते में चला जाएगा। कहा जा रहा है कि अमेरिका के यह पैसे चुकाने की कोई संभावना नहीं है। वहीं, WHO के पास भी अमेरिका से यह पैसा वसूलने का कोई जरिया नहीं है।
अमेरिका के बाहर होने की वजह क्या है?
ट्रंप ने कहा था कि कोविड के समय WHO की नीतियां चीन के पक्ष में थीं। उसने इसे महामारी घोषित करने में भी देरी की। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे संगठन की नीति अमेरिका के खिलाफ है। ट्रंप ने इस बात पर भी नाराजगी जताई थी कि अमेरिका का सबसे बड़ा भागीदार होने के बावजूद, आज तक कोई भी अमेरिकी नागरिक संगठन का महानिदेशक नहीं बना है।
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के वैश्विक स्वास्थ्य कानून और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. लॉरेंस गोस्टिन ने कहा, "कानूनी तौर पर, यह बहुत साफ है कि संयुक्त राज्य अमेरिका तब तक WHO से आधिकारिक रूप से पीछे नहीं हट सकता जब तक कि वह अपने बकाया वित्तीय दायित्वों का भुगतान नहीं कर देता।" उन्होंने यह भी कहा, "लेकिन WHO के पास अमेरिका को भुगतान करने के लिए मजबूर करने का कोई अधिकार नहीं है।"
गोस्टिन ने कहा कि WHO यह प्रस्ताव पास कर सकता है कि अमेरिका पैसे चुकाए बिना बाहर नहीं जा सकता, लेकिन जब ट्रंप किसी भी तरह से पीछे हटने की संभावना रखते हैं, तो इससे तनाव और बढ़ने का खतरा होगा।
गुरुवार को, HHS ने कहा कि WHO को अमेरिकी सरकार से मिलने वाली सारी फंडिंग खत्म कर दी गई है और संगठन में तैनात सभी कर्मचारियों और ठेकेदारों को वापस बुला लिया गया है। उसने कहा कि अमेरिका ने WHO की स्पॉन्सर्ड समितियों, नेतृत्व निकायों, प्रशासनिक ढांचों और तकनीकी कार्य समूहों में आधिकारिक भागीदारी बंद कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि WHO से अलग होने के बावजूद, अमेरिका वैश्विक स्वास्थ्य नेता बना रहेगा।
यह फैसला सिर्फ विश्व स्वास्थ्य संगठन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका लगभग 66 अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी बाहर निकलने की तैयारी में है, जिनमें वह सदस्य है। इसमें भारत के नेतृत्व वाला अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) भी शामिल है।
